भावी पीढ़ी समझेगी करार का महत्व - सोनिया
भारत-अमेरिका परमाणु करार पर वामपंथी दलों की आलोचनाओं को कड़ाई से खारिज करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज कहा कि देश के सुरक्षाहित, परमाणु कार्यक्रम और विदेश नीति से समझौते का कोई सवाल ही नहीं है। सरकार और कांग्रेस नेतृत्व पर पूर्व सहयोगी दलों के आरोपों की पृष्ठभूमि में उन्होंने कहा कि उन्हें किसी से देशभक्ति का प्रमाण-पत्र लेने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पुरजोर समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि देश को अद्यतन परमाणु प्रौद्योगिकी और अन्य देशों से ईंधन तक पहुँच की आवश्यकता है। उन्होंने सवाल किया कि जनता को यह मुहैया कराने के प्रयास के लिए उन्हें गलत कैसे ठहराया जा सकता है। सोनिया ने यहाँ जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, `बावजूद हम पर हमारे देश के हित के खिलाफ जाने का आरोप लगाया जा रहा है। मैं आपके सामने कहना चाहती हूँ, स्पष्ट रूप से पूरे देश के सामने। हमारे सुरक्षा हित, हमारे परमाणु कार्यक्रम और हमारी स्वतंत्र विदेश नीति से समझौते का कोई सवाल ही नहीं है।'पिछले सप्ताह कांग्रेस कार्य समिति में उन्होंने वाम दलों के साथ नाता टूटने पर खेद प्रकट किया था, लेकिन आज वह करार पर उनकी आलोचना का ज्यादा सीधा जवाब देती प्रतीत हुईं। उन्होंने कहा, `और यही हम अपने लोगों के लिए करना चाहते हैं और हमारे लोगों को यह सब उपलब्ध कराने का प्रयास करने के लिए हमें कैसे गलत ठहराया जा सकता है। फिर भी हम पर हमारे देश के हितों के खिलाफ जाने का आरोप लगाया जा रहा है।' सरकार के देश हित के खिलाफ जाने के आरोपों का जिक्र करते हुए सोनिया ने किसी पार्टी का नाम लिए बिना कहा, `हमारी देशभक्ति के लिए हमें किसी पार्टी या किसी व्यक्ति से प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है।' उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर समझौते का कोई सवाल ही नहीं है और `भावी पीढ़ी इस संधि का मूल्य समझेगी, इस बात का महत्व समझेगी, जो प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) आज कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, `देश को सबसे ज्यादा जरूरत ऐसी गौरवपूर्ण राजनीति की है, जो जोड़े न कि ऐसी घृणा फैलाने वाली राजनीति की, जो अन्य पार्टियाँ कर रही हैं। हमें विभाजन की राजनीति की जरूरत नहीं है।' उन्होंने कहा कि परमाणु करार बहुत महत्वपूर्ण है, `क्योंकि इससे और परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनेंगे, ताकि हम ज्यादा ऊर्जा पैदा कर सकें।' सोनिया ने कहा, `बिजली की हमारी माँग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। बिजली की कटौती को समाप्त करने के लिए हमें परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुँच की जरूरत है और यही हम जनता के लिए करना चाहते हैं। हमें देश में खेती, किसानों, स्कूलों, अस्पतालों और हर एक गाँव तथा घरों के लिए ज्यादा से ज्यादा बिजली की दरकार है।' मुद्रास्फीति के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार को तेल की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि से बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मुद्रास्फीति का मुद्दा उठाने के लिए राजग को निशाना बनाते हुए सोनिया ने कहा कि उस के शासनकाल में तेल की कीमत प्रति बैरल 35 अमेरिकी डॉलर थी, जो अब बढ़कर 147 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गयी है। तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए 75 प्रतिशत आयात की बात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, `इससे हमारे ऊपर बहुत भारी बोझ पड़ता है, लेकिन हम बहुत सचेत हैं कि पेट्रो उत्पादों के उपभोक्ता को परेशानी का सामना न करना पड़े। |
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