अंडर वर्ल्ड पर आधारित `सत्या' और `कंपनी' के बाद `कॉन्ट्रेक्ट' के रूप में रामू अपनी हैट्रिक लगाने जा रहे हैं। 1998 में प्रदर्शित `सत्या' में रामू ने अंडरवर्ल्ड की भीतरी जानकारी दर्शकों के सामने प्रस्तुत की थी
अंडर वर्ल्ड पर आधारित `सत्या' और `कंपनी' के बाद `कॉन्ट्रेक्ट' के रूप में रामू अपनी हैट्रिक लगाने जा रहे हैं। 1998 में प्रदर्शित `सत्या' में रामू ने अंडरवर्ल्ड की भीतरी जानकारी दर्शकों के सामने प्रस्तुत की थी, तो 2002 में प्रदर्शित `कंपनी' अंडरवर्ल्ड की कार्यप्रणाली को लेकर बनाई गई थी। अब `कॉन्ट्रेक्ट' में रामू मात्र अंडर वर्ल्ड को ही लेकर नहीं चलते बल्कि उसका ग"जोड़ आतंकवाद से भी करवा दिया गया है, जो एक निहायत ही खतरनाक स्थिति है। फिल्म में कथ्य पर अधिक बल दिया गया है, जबकि स्टार-कास्ट एकदम नई है। कोई जाना-माना कलाकार फिल्म में दिखाई नहीं देगा।
फिल्म के मुख्य किरदारों में से एक अमन (आधविक महाजन) जिंदगी में एक लक्ष्य लेकर चलता है और उसी के लिये अपनी जान भी दे देता है। तत्पश्चात, अहमद हुसैन (पुरंदर प्रसाद- अब तक छप्पन का दुबई वाला डॉन) की इमेज के एकदम विपरीत इस फिल्म में उसे मुंबई पुलिस के एसीपी की भूमिका दी गई है। इस पुलिस च़ीफ के चेहरे पर कभी भी किसी भी तरह के भाव दृष्टिगोचर नहीं होते। उसके पत्थर जैसे सख्त चेहरे के पीछे एक शातिर दिमाग छिपा है। वह किसी पर भी विश्वास नहीं करता। यहाँ तक कि उसके दाहिने हाथ को भी पता नहीं होता कि उसका बायां हाथ क्या कर रहा है? आर डी (सुमीत निझावन) एक खतरनाक गैंगस्टर है। वही अंडरवर्ल्ड और आतंकवाद के बीच होने वाले नापाक करार के लिये जिम्मेदार है। यह गैंगस्टर दिल से एकदम बच्चा है और यही बात उसे अत्यधिक खतरनाक बनाती है। आर डी के इस मुकाम तक पहुँचने के पीछे अर्थात सफल गैंगस्टर बनने के पीछे गूंगा (उपेंद्र लिम्या) की प्रमुख भूमिका रही है। अब गूंगा का बसेरा पानी में एक केलिपोत पर है। वहाँ से वह अपने पोत तक हर आने-जाने वाले पर कड़ी नज़र रखता है। वह एक तरह से गुमनाम और देश निकाले की जिंदगी जी रहा है। उसका एक ही मकसद है, आर डी का कत्ल कर डॉन बनना। आर डी की बहन इया (साक्षी गुलाटी) किसी को अपना दिल दे बै"ती है। यहाँ स्वाल यह है कि वह जिससे प्यार करती है वह वाकई में कोई आदमी है या के मात्र उसका नाम। सुल्तान (जाकिर हुसैन) की जिंदगी का मकसद लोगों का कत्ल करना है तो मुंबई के टॉप काउंटर कॉप दारा (किशोर कदम) को लोगों का खून बहाने में ही खुशी मिलती है।
रामू की इस फिल्म में बच्चों की नर्सरी राइम `ट्विंकल-ट्विंकल' को शॉकिंग अंदाज में पेश किया गया है। यह शॉक लगने की ही बात है कि एक बच्चा इस कविता की आखिरी लाइन `ऍप अबव दी वर्ल्ड सो हाई' के बाद एक और पंक्ति जोड़ कर गाता है- एक बम्ब लगाना मांगता है भाई।
अब देखना यह है कि रामू की यह हैट्रिक कितनी जोरदार लगती है..?