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सपा का संकट
वामदलों की समर्थन वापसी के बाद अल्पमत में आई संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की खेवनहार बन कर आई समाजवादी पार्टी (सपा) संकट में फंसी नजर आ रही है। बागी सांसदों को मनाने और विश्वास मत के दौरान वोटिंग की रणनीति तय करने के लिए पार्टी की आज बुलाई गई बैठक में 39 में से 16 सांसद नदारत रहे। सूत्रों के अनुसार सपा के कई सांसदों के बागी होने के आसार हैं, जिससे सपा को करारा झटका लग सकता है। पार्टी ने आज एक व्हिप जारी किया है, जिसमें सभी सांसदों को 21 और 22 जुलाई को संसद में मौजूद रहने और शक्ति परीक्षण के दौरान सरकार के समर्थन में वोट देने को कहा गया है। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और महासचिव अमर सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। खासकर ऐसे में जबकि सपा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील को पार्टी संप्रग के समर्थन की चिञ् सौंप चुकी है। समर्थन के पत्र में सपा ने सभी सांसदों का नाम दिया है। लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए सपा की मुश्किल बढ़नी तय है। पार्टी के कई सांसद पहले ही विद्रोह का बिगुल बजा चुके हैं और कुछ अन्य सांसदों के भी पार्टी से पल्ला झाड़ने की आशंका जताई जा रही हैं। उल्लेखनीय है कि सांसद अतीक अहमद और अफजल अंसारी जेल में हैं। जबकि राज बब्बर और बेनी प्रसाद पार्टी से निलंबित हैं। हालांकि, इन दोनों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को निजी तौर पर समर्थन का भरोसा जताया है। वहीं, मुनव्वर हसन ने सरकार के खिलाफ वोट देने की घोषणा कर बगावत का ऐलान कर दिया है। मुनव्वर ने परमाणु समझौते को मुसलमानों के खिलाफ करार देते हुए कहा है कि वो संप्रग के पक्ष में किसी भी कीमत पर वोट नहीं देंगे। इसके अलावा हमीरपुर से सांसद राजनारायण बुधोलिया और मोहनलाल गंज के सांसद जय प्रकाश ने भी करार के विरोध में वोट देने का मन बना लिया है। साथ ही कीर्ति बर्द्धन सिंह, मोहन सिंह और रेवती रमन सिंह के भी बागी सांसदों में शुमार होने की आशंका जताई जा रही है। तीनों ही सांसद पार्टी की पिछली बैठक में नदारत थे। बुकमार्क किजिए
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