YS Rajashekar Reddy

मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. राजशेखर रेड्डी ने आज राज्य में वर्तमान बिजली संकट का ठीकरा तेलुगु देशम सरकार पर फोड़ते हुए कहा कि चंद्रबाबू नायुडू की गलत नीतियों के कारण ही आज उनकी सरकार को बिजली कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि इस समस्या पर विधानसभा में चर्चा करने के लिए उनकी सरकार  तैयार है। नई दिल्ली जाने से पहले जनता के नाम जारी खुले पत्र मे मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे तथा इस समस्या के निदान की हरसंभव कोशिश करेंगे।

मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि वर्तमान स्थिति के लिए उनकी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए मुख्य विपक्षी दल तेलुगु देशम के अध्यक्ष नारा चंद्रबाबू नायुडू जनता को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उन्हेंने बताया कि श्री नायुडू द्वारा उनके शासनकाल के दौरान बिना सोचे-समझे लिए गये कुछ गलत निर्णयों के कारण ही आज बिजली संकट उत्पन्न हुआ है। यही कारण है कि उनकी सरकार को अनिवार्य परिस्थितियों में बिजली कटौती करनी पड़ रही है।

डॉ. रेड्डी ने कहा कि बिजली उत्पादन केंद्रों की स्थापना के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। यह काम रात-दिन में होने वाला नहीं है। भविष्य की जरूरतों के मुताबिक योजनाएँ बनाना आवश्यक है, लेकिन दुर्भाग्यवश चंद्रबाबू नायुडू की गत सरकार ने इस ओर जरा भी ध्यान नहीं दिया। तेदेपा सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र में एक भी भारी थर्मल बिजली केंद्र का निर्माण नहीं करवाया। वह हमेशा निजी क्षेत्र की ओर ही ध्यान देती रही। गत तेदेपा सरकार के निर्णयों को गलत करार देते हुए डॉ. रेड्डी ने कहा कि 2500 मेगावाट गैस आधारित बिजली उत्पादन केंद्र की स्थापना की अनुमती ही इसका जीता -जागता उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जीवीके, लांको, स्पेक्ट्रम व रिलायन्स के इन गैस आधारित बिजली केंद्रों को आज आवश्यक गैस आपूर्ति नहीं हो रही है। इस स्थिति का अनुमान लगाने में उस समय चंद्रबाबू सरकार विफल रही। साथ ही उसने एपीजेन्को को भी नजरअंदाज किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आम तौर पर रबी मौसम के बाद बिजली की मांग कम होती है, लेकिन इस बार निर्धारित समय पर बारिश नहीं होने से राज्य में बिजली की माँग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। अन्य राज्यों में भी ठीक इसी तरह की स्थिति होने के कारण अब बिजली खरीदनना भी संभव नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि उनकी सरकार ने बिजली की माँग बढ़ने का सही अनुमान लगाते हुए कई नए बिजली उत्पादन केंद्रों की स्थापना की योजना बनाई है, हालाँकि इन परियोजनाओं को पूरा होने में कुछ और समय लगेगा। नये केंद्रों की जानकारी देते हुए उन्हेंने कहा कि 11वीं योजना के तहत 39 हज़ार करोड़ की लागत से 8,500 मेगावाट बिजली उत्पादन केंद्रों की स्थापना की जिम्मेदारी जेन्को को सौंपी गयी है। उन्होंने आगे बताया कि गत चार वर्षों में माँग के अनुसार, बाहर से बिजली खरीदने हेतु उनकी सरकार ने तीन हज़ार करोड़ खर्च किए हैं।

मुख्यमंत्री ने गत तेदेपा सरकार पर कृष्णा-गोदावरी बेसिन में उपलब्ध गैस पर ध्यान नहीं देकर ऐतिहासिक गलती करने का आरोप लगाते हुए कहा कि तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र के लिए बुलाये गये आफशोर टेंडरों में भाग नहीं लेना ही इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि उन टेंडरों में भाग ले कर कुछ क्षेत्रों को अधिकार में लेकर गैस खोजी जाती, तो शायद आज यह नौबत नहीं आती थी। उन्होंने कहा कि कृष्णा-गोदावरी बेसिन पर गुजरात जैसे राज्य और रिलायन्स जैसी निजी कंपनियाँ अधिकार प्राप्त कर चुकी हैं।