Lal Krishna Advani

सरकार के विश्वास-मत हासिल करने से पहले चल रही राजनीतिक सरगर्मियों के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने आज ऐलान किया कि उनकी पार्टी को जहाँ-जहाँ राज मिलेगा वह `स्वराज्य' को `सुराज' में बदलेगी।

वरिष्ठ नागरिकों के अभिनंदन के लिए यहाँ आयोजित एक समारोह में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवाद आडवाणी ने कहा, `देश में स्वराज्य तो आया पर सुराज नहीं आया। हमें जहाँ-जहाँ राज मिलेगा, हम स्वराज्य को सुराज में बदलेंगे।'

अपने सपनों के भारत की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि 21वीं सदी भारत की होगी। जब आजादी के 75 साल हो जाएँगे, तब भारत की पहचान उसके विश्व स्तरीय संस्थानों और विदेश व्यापार में दस प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले देश के रूप में बननी चाहिए।

मैनेजमेंट गुरु सी. के. प्रह्लाद के हवाले से आडवाणी ने कहा कि वर्ष 1947 में देश को  `पहली आजादी' मिली। वर्ष 1992 में जब आर्थिक सुधार प्रक्रिया चालू हुई, तो भारत को `दूसरी आजादी' मिली और 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के सरकार के समय पोखरण परमाणु परीक्षण करने के बाद तीसरी आजादी मिली। इससे भारत की दुनिया में इज्जत बढ़ी।'

आडवाणी ने कहा कि आजादी के बाद से 19 महीने के आपातकाल को छोड़ भारत दुनिया का सफल लोकतंत्र रहा है। हमारे यहाँ पश्चिमी देशों की तरह असहिष्णुता नहीं है। उन्होंने माना कि आजादी के बाद के शुरुआती समय में भारत को तिरस्कार भाव से देखा जाता था, लेकिन अब दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ा है।

आडवाणी ने कहा कि उन्हें अपने जीवन का अर्थ और खुशी दोनों ही प्राप्त करने में सफलता मिली। उनके परिवार से जहाँ उन्हें खुशी मिली वहीं वैचारिक परिवार से जीवन का अर्थ मिला। उन्होंने कल से शुरू हो रहे लोकसभा के विशेष सत्र और विश्वास-मत के बारे में तथा आज चल रहे घटनाक्रम पर बोलने से इनकार कर दिया।

आडवाणी ने कहा, `मैं आज राजनीति पर नहीं बोल रहा। हालाँकि पत्र-पत्रिकाओं के लिए मेरी बात अच्छी कापी तैयार करने वाली नहीं होगी, क्योंकि राजनीति से ही अच्छी कापी बनती है, कल-परसों तो मुझे इस बारे में बोलना ही है, इसलिए मैं आज राजनीति पर कुछ भी नहीं बोलूँगा।'