Prakash Karat

लोकसभा में 22 जुलाई को प्रस्तावित विश्वास-मत के खिलाफ वोट देने की राष्ट्रीय लोकदल की घोषणा और जनता दल (सेकुलर) के परमाणु करार विरोधी खेमे में आने से उत्साहित मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने `करार तथा मनमोहन सरकार के लिए कयामत' की भविष्यवाणी की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर सदन में हारने के बाद भी सरकार ने करार पर अमल की कोशिश की तो देश विद्रोह कर देगा।

माकपा के महासचिव प्रकाश करात ने पार्टी के शीर्ष सांगठनिक निकाय केन्द्राrय समिति की दो दिन की बैठक की समाप्ति पर आज यहाँ पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारत-अमेरिका परमाणु करार तथा उसे आगे बढ़ाने पर आमादा कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की खिलाफत करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और 22 जुलाई करार तथा सरकार दोनों के लिए कयामत का दिन होगा। उन्होंने वाम सहमति वाले साझा न्यूनतम कार्यक्रम के खुले उल्लंघन तथा देश को भरोसे में लिए बिना परमाणु `123' करार पर हस्ताक्षर के बाद भारत केन्द्रित परमाणु सुरक्षा उपायों का मसौदा देश को बताये बिना अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के गवर्नर बोर्ड की मंजूरी के लिए भेजे जाने को मनमोहन सिंह सरकार का विश्वासघात बताया। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने विश्वास-मत हासिल किये बिना गवर्नर बोर्ड में नहीं जाने का वचन दिया था।

माकपा नेता ने चेतावनी दी कि विश्वास-मत हारने के बाद भी अगर संप्रग सरकार ने करार पर अमल के प्रयास जारी रखे तो देश की जनता इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।