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भारतीय मूल के नेता बने नेपाल के राष्ट्रपति
नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राम बरन यादव माओवादियों द्वारा समर्थित उम्मीदवार को हरा कर आज नेपाल के पहले राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए। राम बरन यादव के राष्ट्रपति चुने जाने से अप्रैल में हुए ऐतिहासिक चुनाव में माओवादियों की जीत के बाद राजनीतिक समीकरणों में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। इससे पहले शनिवार को राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव के पहले दौर में निर्णायक मत प्राप्त करने में विफल रहने के बाद आज दूसरे चरण के मतदान में मधेशी नेता यादव को 308 मत प्राप्त हुए। राष्ट्रपति पद के इस चुनाव में 594 सदस्यीय संवैधानिक सभा ने माओवादी नेता रामराजा प्रसाद सिंह को खारिज कर दिया, जिन्हें 282 मत मिले। उल्लेखनीय है कि नेपाल में 240 वर्ष पुराने राजतंत्र के खात्मे के बाद पिछले तीन महीने से जारी राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए देश में राष्ट्रपति के चुनाव को अहम कदम माना जा रहा था। बहरहाल यादव के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद राजनीतिक जटिलताएँ और भी बढ़ गई हैं, क्योंकि माओवादियों को तीन और दलों ने दरकिनार कर दिया है और वह उनके साथ सत्ता में हिस्सेदारी नहीं करना चाहते हैं। डॉक्टरी पेशे से राजनीति में आए नेपाल के पहले राष्ट्रपति राम बरन यादव भारतीय मूल के हैं और उनकी ज्यादातर शिक्षा दीक्षा भारत में ही हुई है। यादव पर एक ऐसे समय में नये संविधान के निर्माण की देखभाल करने की जिम्मेदारी आई है, जब माओवादियों को कम से कम फिलहाल सियासी रंगमंच के एक किनारे ढकेले जाने से राजनीतिक मतभेद तीखे हो गए हैं, देश के छापामार युग में लौटने का अंदेशा हो गया है। यादव नेपाल के बाहर एक अनजाना-सा नाम थे। उन्हें माओवादी उम्मीदवार और मधेसी नेता रामराज प्रसाद सिंह के खिलाफ प्रमुख पार्टियों ने उतारा। पहले दौर में कोई नतीजा नहीं निकलने के बाद दूसरे दौर के चुनाव में यादव ने सिंह को 26 मतों से परास्त किया। उन्हें कुल मिलाकर 308 मत मिले, जबकि कल तक दौड़ में सबसे आगे दिख रहे माओवादी उम्मीदवार को महज 282 पर संतोष करना पड़ा। उम्र के 60 पायदान तय कर चुके यादव ने सियासत की बारीकियाँ नेपाली कांग्रेस के दिग्गज नेताओं- बी. पी. कोइराला और गणेश मान सिंह से सीखी। उनके राजनीतिक गुरुओं में मधेशी नेता रामनारायण मिश्र भी शामिल हैं। बुकमार्क किजिए
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