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जेल के पंछी भी आये
संप्रग सरकार की शक्ति जाँचने के लिए आज जब लोकसभा बैठी तो उसमें सब थे। दिग्गज राजनेता, रणनीतिकार, कलाकार और जेलों की सींकचों के पीछे से चलकर आये समाजसेवी। लेकिन दो पुरोधा नहीं दिखे अटल बिहारी वाजपेयी और जॉर्ज फर्नांडिस। सरकार की तरफ से संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी भारतीय हस्तशिल्प की कलाकारी की उम्दा मैरून बॉर्डर वाली कर्पूरी रंग की सूती साड़ी में मौजूद थीं, तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी परंपरागत नीली पगड़ी और सफेद कुर्ता पायजामे में थे। गले में सोने की चेन पहनी सोनिया और मनमोहन के बीच सरकार के मुख्य रणनीतिकार प्रणव मुखर्जी विराजमान थे। प्रणव दा ने धोती और सिल्क का कुर्ता धारण कर रखा था। राहुल गांधी कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद सदन में पहुँचे और अपने लिए निर्धारित पंक्ति में बैठ गये। सदन में ज़्यादातर सदस्यों की मौजूदगी की वजह से कई मंत्रियों को पीछे की पंक्तियों में जगह मिली और मणिशंकर अय्यर सबसे आखिरी लाबिन में बैठ थे। विश्वास प्रस्ताव रखे जाने से पहले अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ने का सोमनाथ चटर्जी पर भारी दबाव था, लेकिन माकपा के इस वरिष्ठ नेता ने पार्टी के फरमान को स्वीकार करने की बजाय सदन का संचालन संभाला और वह पूरे इत्मीनान में दिखाई दे रहे थे। आमतौर पर सांसदों को सदन में मौजूद रहने और लोकचर्चा में सलीके से हिस्सेदारी करने का समय-समय पर पाठ पढ़ाने वाले सोमनाथ दा ने बड़ी संख्या में सांसदों की मौजूदगी पर कहा, `आई एम वेरी हैप्पी टू सी फुल हाउस मैं सदन भरा देखकर बहुत खुब हूँ।' सदन का नजारा कुछ बदला-बदला भी था। समर्थन के सवाल पर काफी मोल तोल करने वाले गुरुजी शिबु सोरेन सत्तापक्ष की दूसरी पंक्ति में सोनिया के पीछे बै"s थे, तो सरकार बनवा कर उसे चार साल दो महीने तक चलवाने वाले वामदल आज विरोधी खेमे में थे। इतना ही नहीं कभी विरोधी रही सपा सरकार के पक्ष में खड़ी थी। रेल-मंत्री लालू प्रसाद मौजूद हों और कुछ हो हल्ला न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। लालू ने सदन की बै"क शुरू होने के बाद खुद ही अकेले नारा लगा दिया। कई सांसद इस विशेष सत्र में हिस्सा लेने के लिए जेलों से छूटकर आये हैं और वे सदन में मौजूद दिखे। इनमें राजद के मोहम्मद शहाबुद्दीन और राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, सपा के अतीक अहमद और लोजपा के सूरजभान शामिल हैं। शहाबुद्दीन और पप्पू अगल-बगल बैठ दिखे। पप्पू की पत्नी रंजीत रंजन पीछे की पंक्ति में बैठी थीं। फिल्मी दुनिया से ताल्लुक रखने वाले राज बब्बर और जया प्रदा बैठक शुरू होने के साथ मौजूद थे। विशेष सत्र में होने वाली बहस को देखने के लिए कई ऐसी हस्तियाँ भी मौजूद थीं, जो लोकसभा की सदस्य नहीं हैं। ऐसे लोगों में राज्यसभा सदस्य राहुल बजाज, भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद, माकपा नेत्री वृंदा करात आदि शामिल थीं। पत्रकार दीर्घा भी खचाखच भरी थी। स्थिति यह रही कि कई संवाददाताओं को खड़े होने तक की जगह नहीं मिली। लोकसभा सचिवालय ने पहले से ही इसका अनुमान लगाते हुए पत्रकारों के लिए प्रेस दीर्घा के बाहर तीन विशेष प्लाज्मा टेलीविजन क्रीन की व्यवस्था की थी। ऐसा ही एक टीवी चैनलों के लिए स्वागत कक्ष के पास लगाया गया था। सचिवालय ने पत्रकारों की भीड़ को देखते हुए उनके आने-जाने की व्यवस्था भी निर्धारित की थी। बुकमार्क किजिए
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