विशेष श्रेणीइस लेख को |
`अर सिख हूँ... रन में तब जूझ मरूँ'
परमाणु करार मुद्दे पर वामदलों के समर्थन वापसी के बाद विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज नौवें सिख गुरु गोविन्द सिंह की वाणी का हवाला देकर कर कहा कि वह एक सिख हैं, जो रण छोड़ने की बजाय लड़कर मरने का वरदान चाहते हैं। चौदहवीं लोकसभा के 14वें सत्र में एक पंक्ति का विश्वास प्रस्ताव पेश करने के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन का समापन प्रधानमंत्री ने गोविन्द सिंह की इन पंक्तियों से किया.... `देहु शिवा वरमोहे शुभ करमन तें कबहुँ न टरूँ। प्रधानमंत्री द्वारा विश्वास प्रस्ताव पेश करते वक्त गुरुवाणी के जरिये खुद को सिख बताने के राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं और इसे देश के पहले सिख प्रधानमंत्री की सरकार के खिलाफ मतदान करने के मुद्दे पर अकाली दल में कथित मतभेद से जोड़कर देखा जा रहा है। बुकमार्क किजिए
पाठकों के भावभाव #1 (व्यक्त करने वाले Sardul Singh)
दर्जा:
![]() ![]() ![]() ![]()
Our PM is educated and he doing good for country good luck
भाव #2 (व्यक्त करने वाले kulvinder uppal)
दर्जा:
![]() ![]() ![]() ![]()
what to talk about it is totally wrong,.....this was written by guru Gobind Singh it is fine but He was 10th guru not 9th guru. Please tell editor and our PM too.
Thanks.
|
|