Dr Manmohan Singh

परमाणु करार मुद्दे पर वामदलों के समर्थन वापसी के बाद विश्वास  प्रस्ताव पेश करते हुए  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज नौवें सिख गुरु गोविन्द सिंह की वाणी का हवाला देकर कर कहा कि वह एक सिख हैं, जो रण छोड़ने की बजाय लड़कर मरने का वरदान चाहते हैं।

चौदहवीं लोकसभा के 14वें सत्र में एक पंक्ति का विश्वास प्रस्ताव पेश करने के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन का समापन  प्रधानमंत्री ने गोविन्द सिंह की इन पंक्तियों से किया....

`देहु शिवा वरमोहे शुभ करमन तें कबहुँ न टरूँ।
  न डरूँ अरौं जब जाए लडूँ निश्चय कर अपनी जीत करूँ।
  अर सिख हूँ अपने ही मन सौं इहि लालच हों गुन तौं  उचरौं।
  जब आव की औंध निधान बनौ अत हि रन में तब जूझ मरूँ।'

प्रधानमंत्री द्वारा विश्वास  प्रस्ताव पेश करते वक्त गुरुवाणी के जरिये खुद को सिख बताने के राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं और इसे देश के पहले सिख  प्रधानमंत्री की सरकार के खिलाफ मतदान करने के मुद्दे पर अकाली दल में कथित मतभेद से जोड़कर देखा जा रहा है।