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तुम्हें क्या पेश करूँ - कन्हैयालाल शर्मा
तुम्हें क्या पेश करूँ एक तश्तरी में पुखराज व नीलम एक तश्तरी में माणिक और पन्ना तुम्हें पेश करूँ एक तश्तरी में अपनी वफा की खुशबू दोस्ती की इत्रदानी (काँच की नाजुक इत्रदानी) अपने जज्बात के सफेद फूल (रजनीगंधा) एहसास के लाल कँवल तुम्हें पेश करूँ बिल्लोरी काँच का रंगीन फानूस यादों की बारात उत्सव की शहनाई महफिलों की मस्ती तुम्हें पेश करूँ प्रेम दिल में कली की तरह बन्द दिखलाने की चीज नहीं सिर्फ महसूस करने की चीज है इन नाज़ुक लरज़ते जज्बात को अपने दिल में रख लो इस खुशबू को दिल में बसा लो खुश रहो, आबाद रहो हमेशा जिन्दाबाद रहो पूजा की पवित्रता अध्यात्म की शान्ति सामवेद के मंत्रों का गायन यज्ञ में आहूति का धुआँ उठता रहे दुआओं की बारिश बरसती रहे आशीर्वाद के फूल खिलते रहें। - कन्हैयालाल शर्मा
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