बराबरी का ज़माना है, तुम न साथ चलो
मेरा लिबास पुराना है, तुम न साथ चलो
मेरे खिलाफ ज़माना है, तुम न साथ चलो
खबर नहीं कहाँ जाना है, तुम न साथ चलो
कहेगा कौन भला फिर मुझे खुदा हाफिज़
तुम्हें ये फर्ज़ निभाना है, तुम न साथ चलो
बिछड़ के मिलने में आता है लुत्फ मिलने का
अगर ये लुत्फ उठाना है, तुम न साथ चलो
तुम्हें है आरज़ू म़ांजिल की और `राहत' को
तलाशे राह में जाना है, तुम न साथ चलो
- राहत हुसैन राहत