विशेष श्रेणीइस लेख को |
बचाया जायेगा रामसेतु : केन्द्र
केंद्र ने आज उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि वह रामसेतु को बचाने के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाशने के उसके सुझाव पर गौर कर रहा है। केंद्र सरकार के वकील एफ. एस. नरीमन ने कहा कि न्यायालय के सुझाव पर गंभीरता से विचार कर रही है और इस मुद्दे पर अपने रुख से सरकार को 29 जुलाई को अवगत करा देगी। न्यायालय ने कल सरकार को सुझाव दिया था कि कुछ बीच का रास्ता निकाला जाना चाहिए ताकि करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा की जा सके। भले ही इसके लिए समुद्री पर्यावरण को थोड़ा-बहुत नुकसान हो जाए। न्यायालय ने कहा कि वैसे भी इस तरह की परिस्थितियों में पर्यावरण में कुछ फेरबदल की गुंजाइश रहती है। मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति आर. वी. रवीन्द्रन और न्यायमूर्ति जे. एम. पांचाल की पीठ ने केंद्र से कहा कि विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा समय - समय पर गठित 19 विशेषज्ञ समितियों में से 18 ने वैकल्पिक रास्ता तलाशने का सुझाव दिया, जबकि सिर्प एक ने ही करीब 25 हजार करोड़ रुपये की सेतुसमुद्रम परियोजना को पूरा करने के लिए रामसेतु को नष्ट करने की बात कही थी । श्री नरीमन ने कल पद्म पुराण और कंबन रामायण का जिक्र करते हुए न्यायालय को बताया था कि इन ग्रंथों में लिखा है कि भगवान श्री राम ने अपनी पत्नी सीता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए लंका पर चढ़ाई करने के वास्ते रामसेतु का निर्माण किया था, लेकिन रावण का वध करने के बाद लंका से लौटते समय उन्होंने पुल को नष्ट कर दिया था। इसलिए इस समय रामसेतु का अस्तित्व नहीं है लिहाजा सरकार कोई पुल नष्ट नहीं कर रही है। रामसेतु 35 किलोमीटर लंबा है, जबकि सरकार इसके मात्र 300 मीटर हिस्से को ही नष्ट करने की योजना बना रही है। याचिकाकर्ताओं की माँग है कि रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाये और इसे नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा इसे नष्ट करने से बड़ी संख्या में मछुआरों की आजीविका का जरिया खत्म हो जाएगा। बुकमार्क किजिए
पाठकों के भाव |
|