मुद्रास्फीति की दर थोड़ी कम हुई
मुद्रास्फीति की दर 12 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान गिरकर 11.89 प्रतिशत रह गयी, जो पूर्व सप्ताह में 11.91 प्रतिशत थी। समीक्षाधीन अवधि में चाय, आयातित खाद्य तेल और सामुद्रिक मछली जैसे कुछ खाद्य उत्पादों की कीमत में कमी के कारण मुद्रास्फीति की दर में 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। 2007 में 12 जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान यह दर 4.76 प्रतिशत रही थी। मुद्रास्फीति की दर हालाँकि अभी भी इतनी अधिक है कि भारतीय रिजर्व बैंक 29 जुलाई को पेश होने वाली अपनी तिमाही समीक्षा में संभवत: कुछ और कदम उठा सकता है। वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक, कुल 98 प्राथमिक उत्पादों में से दस की कीमत में गिरावट दर्ज की गयी, जबकि 54 अन्य उत्पादों की कीमत में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई। थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति आयातित खाद्य तेल, काटन सीड, ऑयल, मूंगफली तेल और मसालों की कीमत में गिरावट के कारण मामूली गिरी। काफी, फल और सब्जी के अलावा मटन तथा उडद, मूंग और अरहर जैसे कुछ अन्य उत्पादों की कीमत हालाँकि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान चढ़ गयी। तेरह साल के उच्चतम स्तर पर चल रही मुद्रास्फीति की दर सरकार के लिए चिन्ताजनक है। रिजर्व बैंक भी कुछ और उपाय करने के लिए बाध्य हो सकता है। उसे ऋण नीति की समीक्षा इसी महीने के अंत तक पेश करनी है। रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति की बढ़ती दर पर अंकुश लगाने के लिए 24 जून को रेपो दर और सीआरआर (नकद आरक्षित अनुपात) में से प्रत्येक में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर चुका है। फरवरी से मुद्रास्फीति की दर में लगातार बढ़ोत्तरी जारी थी। ईंधन खाद्य उत्पादों और सीमेंट, लोहा, इस्पात जैसे कुछ आवश्यक उत्पादों की ऊँची कीमत के कारण ऐसा हुआ। बुकमार्क किजिए
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