Terroist attack in Amarnath

कश्मीर में आतंकी हिंसा में भयानक तेजी आ गई है। आज भी आतंकियों ने श्रीनगर में टूरिस्टों, अमरनाथ श्रद्धालुओं और उन प्रवासी श्रमिकों पर हथगोले से हमला बोला जो धमकी के बाद कश्मीर का त्याग कर रहे थे। हथगोले के हमले में पाँच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 3 बच्चे हैं। 20 जख्मी हुए हैं। घायलों में टूरिस्ट, अमरनाथ यात्री और प्रवासी श्रमिक भी हैं। आतंकियों ने डोडा में भी एक पूर्व आतंकी के परिवार के 4 सदस्यों की हत्या कर दी।

ताजा हमला श्रीनगर के बटमालू स्थित बस स्टैंड पर हुआ। आतंकियों ने ग्रेनेड फैंका तो 5 की मौत हो गई। हमला उस समय हुआ जब प्रवासी श्रमिक, अमरनाथ यात्री तथा टूरिस्ट जम्मू आने के लिए बस पकड़ रहे थे। मरने वालों में 3 बच्चे तथा एक महिला शामिल हैं। कश्मीर रेंज के पुलिस डीआईजी एमपी नथनियान ने बताया कि फिलहाल मरने वालों की पहचान नहीं हो पाई है लेकिन उन्होंने इसकी पुष्टि की है कि मरने वाले सभी राज्य के बाहर के लोग हैं। वे मानते थे कि आतंकी हमले बढ़ने की उनके पास सूचनाएं थी। इस हमले पर वे यह दावा नहीं करते थे कि आतंकी हमला सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर किया गया हो क्योंकि हमले वाले स्थान पर न ही कोई सुरक्षाकर्मी था, न ही कोई सुरक्षा चौकी थी और न ही इस हमले में कोई सुरक्षाकर्मी जख्मी हुआ था। जिससे स्पष्ट था कि हमला राज्य के बाहर के लोगों को निशाना बना कर किया गया था।

नागरिक सचिवालय से मात्र आधा किमी की दूरी पर स्थित इस अति सुरक्षित समझे जाने वाले बटमालू बस स्टैंड पर हुए हमले में 20 अन्य जख्मी भी हुए हैं। घायलों में से आधों की हालत गंभीर है। हमले के बाद सुरक्षा बढ़ाने का दावा तो किया जा रहा है लेकिन यह दावा टूरिस्टों को कश्मीर जल्द से जल्द छोड़ने से नहीं रोक पा रहा है।

आतंकी हिंसा यहीं नहीं थमी थी। आतंकियों ने डोडा जिले में आत्मसमर्पण कर चुके एक आतंकी के परिवार के चार सदस्यों की भी हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि आज सुबह आतंकी मरमत गांव में गुलाम हसन वानी के मकान में घुस आए और गोलियां चलाकर उसके परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, वानी हिज्बुल मुजाहिदीन के लिए काम करता था लेकिन बाद में उसने आत्मसमर्पण कर दिया था।

गुलाम हसन वानी, उनकी 31 वर्ष की पत्नी अजीमा बेगम और पुत्री आसिफा की मौके पर ही मौत हो गथ जबकि वानी के पुत्र आसिफ की अस्पताल में मौत हो गथ। पुलिस और सेना ने हमला करने वाले आतंकियों को पकड़ने के लिए मरमत के जंगलों में व्यापक घेराबंदी और खोज अभियान चलाया है। ग्रामीणों ने हादसे पर विरोध प्रदर्शन भी किया तथा घटना के विरोध में स्थानीय तौर पर बंद रखा गया। वानी ने पिछले वर्ष नवंबर में सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था।