मौसम विभाग द्वारा बताए गए अगले सप्ताह के मौसम पूर्वानुमान में मध्य तथा इससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में खासकर आंध्र-प्रदेश तथा महाराष्ट्र में सामान्य से भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग द्वारा बताए गए अगले सप्ताह के मौसम पूर्वानुमान में मध्य तथा इससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में खासकर आंध्र-प्रदेश तथा महाराष्ट्र में सामान्य से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। देश के पश्चिमी तट तथा गुजरात में भी सामान्य से अत्यधिक बारिश की संभावना है। हिमालय के निचले क्षेत्रों तथा इससे सटे गंगा के मैदानी क्षेत्रों एवं पूर्वोत्तर राज्यों में आने वाले सप्ताह के दौरान बारिश में कमी आ सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत में गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।
सप्ताह के दौरान मानसून अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर में हिमालय की तलहट्टी में ही बना रहा। फलस्वरूप बारिश गंगा के मैदानी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों तथा उप-हिमालय क्षेत्र, पश्चिम बंगाल तथा सिक्किम तक ही सीमित रही है।
तटीय आंध्र-प्रदेश, रायलसीमा तथा तमिलनाडु जैसे दक्षिण प्रायद्वीपीय हिस्सों में सामान्य से अत्यधिक वर्षा हुई। देश के अन्य हिस्सों में वर्षा गतिविधियाँ सामान्यत अल्प रहीं। इस सप्ताह के दौरान वर्षा पूरे देश में लंबी अवधि औसत (एलपीए) से 33 प्रतिशत नीचे रही।
क्षेत्र वास्तविक वर्षा एलपीए से प्रतिशत प्रगति
पूरे देश में 370.0 -2
उत्तर पश्चिम भारत 320.3 43
मध्य भारत 348.1-15
दक्षिण प्रायद्वीप 219.3-32
उत्तर पूर्व भारत 697.73
36 मौसम विज्ञान उप-खंडों में से 9 उप-खंडों में अत्यधिक वर्षा हुई। बारह से ज्यादा उप-खंडों में सामान्य वर्षा हुई तथा 15 से ज्यादा उप-खंडों में कम वर्षा हुई। अल्प वर्षा वाले मौसम विज्ञान उप-खंडों तथा 23 जुलाई, 2008 तक उनके कुल वर्षा के आँकड़े निम्न तालिका में दर्शाए गए हैं।
असम और मेघालय-26
नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम तथा त्रिपुरा - 26
गुजरात क्षेत्र - 36
सौराष्ट्र तथा कच्छ - 35
कोंकण तथा गोवा - 24
मध्य महाराष्ट्र - 49
मराठवाड़ा - 62
विदर्भ - 35
तटीय आंध्र-प्रदेश - 22
तेलंगाना - 30
रायलसीमा - 22
तटीय कर्नाटक - 38
उत्तर आंतरिक कर्नाटक - 53
दक्षिण आंतरिक कर्नाटक - 28
केरल - 43
मौसम विज्ञान के ताजे आकलन तथा संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल यह बताते हैं कि मानसून दक्षिण दिशा की ओर बढ़ेगा। फलस्वरूप 28 जुलाई के आस-पास से पश्चिम-मध्य तथा उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से सटे क्षेत्रों में कम दबाव का क्षेत्र बनेगा। यह प्रगति पश्चिम तट तथा मध्य और प्रायद्वीपीय भारत से सटे क्षेत्रों में मानसून की गतिविधियाँ बने रहने की सूचक है।