जर्मनी के वैज्ञानिकों का दावा है कि जगमगाते हीरों ने पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत की थी। अमेरिकन केमिकल सोसाइटी की पत्रिका क्रिस्टल ग्रोथ एण्ड ड़िजाइन के 6 अगस्त के अंक में कहा गया है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत हीरों के चलते हुई थी।
जर्मनी के वैज्ञानिकों का दावा है कि जगमगाते हीरों ने पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत की थी। अमेरिकन केमिकल सोसाइटी की पत्रिका क्रिस्टल ग्रोथ एण्ड ड़िजाइन के 6 अगस्त के अंक में कहा गया है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत हीरों के चलते हुई थी।
वैज्ञानिकों का लंबे समय से मानना रहा है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत प्राथमिक रसायनों के एक शोरबे में हुई थी, लेकिन कोई भी यह नहीं जानता कि जीवन की शुरुआत करने वाले यह साधारण अमीनो एसिड किस प्रकार जटिल पोलीमर में तब्दील हुए, जिनके चलते अंतत जीवन अस्तित्व में आया।
तीन दशक पहले से भी पूर्व किये गये कार्य की पुष्टि करने के लिए प्रयोगशाला में हुए प्रयोगों में उल्म विश्वविद्यालय के जर्मन वैज्ञानिक आंदेई सोमर डैन जू और हैंस जोएर्ग फेच ने पाया कि हाइड्रोजन के साथ क्रिया करने पर प्राकृतिक हीरों ने सतह पर पानी की क्रिस्टलीय परत का निर्माण कर दिया।
लाइव साइंस वेबसाइट ने वैज्ञानिकों के हवाले से कहा है, `हाइड्रोजनीकृत हीरों का सिद्धांत जीवन की शुरुआत के तमाम सिद्धांतों में सबसे आगे है।' रिपोर्ट के अनुसार, हीरे कार्बन की क्रिस्टलीय अवस्था हैं, जो ग्रह पर जीवन के सर्वाधिक प्राचीन जीवन से पूर्व भी मौजूद थे। हम यह भी जानते हैं कि जीवन के लिए जल आवश्यक है।
इसके अलावा परीक्षणों में विद्युतीय संवहन की उपस्थिति पायी गयी, जो जीवन के प्रथम चिह्न को शुरू करने के लिए आवश्यक रासायनिक क्रियाओं की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण थी। जर्मनी के वैज्ञानिकों का कहना है कि जब लगभग एक अरब साल पहले प्रारंभिक अणु पृथ्वी के शुरुआती वातावरण में मौजूद इन हाइड्रोजनीकृत हीरों की सतह पर गिरे तो इसके परिणामस्वरूप हुई अधिक जटिल जैविक अणु पैदा हुए, जिससे आखिरकार जीवन उत्पन्न हुआ।
इस अध्ययन में हालाँकि निष्कर्ष रूप में यह निर्धारित नहीं किया गया है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई। एक अन्य सिद्धांत में कहा गया है कि पृथ्वी पर जीवन अंतरिक्ष से आया। यह जीवन सूक्ष्म उल्काओं या विराट धूमकेतुओं के भीतर मौजूद जीवों से पृथ्वी पर पहुँचा।