रामसेतु मुद्दे पर नई पहल
ऐसा लगता है कि कांग्रेसनीत संप्रग सरकार आने वाले चुनाव में रामसेतु का मुद्दा जीवित रखने के पक्ष में नहीं है। इस बाबत उसने जो गलतियाँ कीं और भाजपा सहित अन्य हिन्दू संगठनों ने जिस तरह उसे मुद्दे के तौर पर उछालकर धर्मप्राण हिन्दू जनता के मन में विक्षोभ पैदा किया, उसने सरकार को अपना कदम पीछे खींचने पर बाध्य किया है। हालाँकि अभी भी अपने सहयोगी दल द्रमुक के दबाव में वह वर्तमान परियोजना के प्रारूप से अपना पीछा नहीं छुड़ा पा रही है, लेकिन इतनी प्रतिबद्धता उसने जरूर दर्शायी है कि अगर इसका कोई समुचित विकल्प मिलता है तो वह इसे छोड़ भी सकती है। सेतुसमुद्रम परियोजना के विरोध में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने सरकार से पूछा भी है कि इस परियोजना का यदि कोई विकल्प है तो सरकार उसका पता लगाये।
संभवत न्यायालय को संतुष्ट करने और इस मुद्दे को कम से कम चुनाव तक कोल्ड स्टोरेज के हवाले करने के लिए ही उसने प्रसिद्ध पर्यावरणविद और नोबेल पुरस्कार ग्रहीता आर.के. पचौरी की अध्यक्षता में एक छ सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। वैसे उच्चतम न्यायालय ने भी इससे संबंधित सभी याचिकाओं पर अपनी सुनवाई पूरी कर ली है, लेकिन वह इस समिति द्वारा प्रस्तुत निष्कर्षों का अध्ययन करने के बाद ही अपना फैसला सुनाने के पक्ष में है। सरकार के सामने मजबूरी यह है कि अगर वह रामसेतु के पक्ष में राय प्रकट करती है तो उसकी प्रमुख सहयोगी द्रमुक उससे पल्ला झाड़ लेगी और अगर रामसेतु के विपक्ष में जाती है तो उसके खिलाफ भाजपा को एक बहुत बड़ा भावनात्मक मुद्दा मिल जाएगा। इसलिए उसने हाँ - ना के बीच का रास्ता निकालकर फिलहाल इसे टाल देना ही उचित समझा है।