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स्वास्थ्य सेवाओं की बिगड़ती सेहत
किसी ने सच ही कहा है कि स्वास्थ्य ही धन है। सचमुच बगैर अच्छे स्वास्थ्य के कुछ भी ठीक नहीं लगता। मानव को संसाधन बनाने में सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य का होना अनिवार्य है।
आवश्यक है पर्यावरण संरक्षण
संसार में सूर्य की ऊर्जा को ग्रहण करके भोजन के निर्माण का कार्य केवल हरे पौधे ही कर सकते हैं। इसलिए पौधों को उत्पादक कहा जाता है। पौधों द्वारा उत्पन्न किए गए भोजन को ग्रहण करने वाले जंतु शाकाहारी होते हैं और उन्हें हम प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता कहते हैं।
पृथ्वी के स्वास्थ्य पर निर्भर है हमारा स्वास्थ्य
प्रकृति और आदमी का सदा से साथ रहा है। इसी प्रकृति के पर्यावरण में हम, अन्य जीव तथा पेड़-पौधे जीते हैं। यदि प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा, तो हम सब पर उसका बुरा असर पड़ेगा। पिछले कुछ वर्षों से इस संतुलन में बहुत-कुछ बिगाड़ आया है।
ये आँसू हैं दिल की जुबान
अभिव्यक्ति का एक जरिया है आंसू। गरीब-अमीर, बच्चा, जवान, बूढ़ा सभी दुःख, क्रोध, दर्द के आवेग में आंसू बहाते हैं। कई लोग जो भावुक प्रवृत्ति के होते हैं, भावना के आवेग में आंसुओं को रोक नहीं पाते। कई भावुक लोगों को अपने से ज्यादा दूसरों का दुःख तड़पा जाता है ।
मनशक्ति का मायावी जखीरा
मानवीय मन-मस्तिष्क को शरीर का संचालन और नियमनकर्ता माना गया है। मनशास्त्री इसे शरीर का स्वामी मानते हैं, किन्तु भारतीय तत्व दर्शन मन को शरीर का संचालन करने के लिए आत्मा द्वारा नियुक्त एक कर्मचारी मात्र मानता है। उसकी सुसंस्कारिता, सुगढ़ता, पवित्रता-प्रखरता न केवल मनुष्य के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य, वरन आत्मोत्कर्ष का भी आधार बनती है। प्री-एक्लेम्प्शिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं के लिए उम्मीद
हर साल गर्भावस्था के दौरान करीब 60,000 महिलाओं और हजारों बच्चों को मौत की नींद सुला देने वाली रहस्यमयी बीमारी `प्री-एक्लेम्प्शिया' की गुत्थी शीघ्र ही सुलझने की उम्मीद है, क्योंकि चूहों पर किए गए अनुसंधान से पता चला है कि इस बीमारी का कारण एक खास जीन की अनुपस्थिति होती है। सामान्य रोग है ऑस्टियो अर्थराइटिस
इस रोग में कार्टिलेजों (हड्डियों के सिरों को ढकने वाले सुरक्षा उत्तकों) में विकार आ जाता है। परिणामस्वरूप, इनमें सूजन आ जाती है और हड्डियों के जोड़ परस्पर रगड़ खाने लगते हैं। ऐसा प्राय घुटनों, नितंबों, उंगलियों तथा मेरू की हड्डियों में होता है। वैसे कलाइयों, कोहनियों, कंधों तथा टखनों के जोड़ भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। जानिए प्रमुख बीमारियों के पथ्य-अपथ्य
बीमार होना कोई बड़ी बात नहीं है। जब भी खान-पान, रहन-सहन में थोड़ी-सी भी प्रतिकूलता हो जाती है, तभी इंसान बीमार पड़ जाता है। बीमार पड़ने पर चिकित्सक की सलाह पर रोगी औषधि का सेवन करता है, किन्तु पथ्य-अपथ्य की जानकारी न होने के कारण वह परहेज नहीं करता। संतुलित खान-पान उम्र बढ़ाने में सहायक
संतुलित खान-पान की महत्ता हम सभी जानते हैं, परन्तु फिर भी हम इसके प्रति प्रतिबद्ध नहीं रहते हैं। संतुलित खान-पान न सिर्फ हमारे स्वास्थ्य को ठीक रखता है, अपितु हाल ही में कैंम्ब्रिज विश्वविद्यालय में हुए एक शोध के अनुसार यह किसी व्यक्ति की आयु बढ़ाने में भी सहायक है। |
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