विशेष श्रेणी |
जोगी तेरा रूप निराला, अमनरनाथ में डेरा डाला
अमरनाथ की गुफा भगवान शिव के प्रमुख तीर्थ-स्थलों में से सर्वोपरि है। इस गुफा में निश्चित समय पर बर्फ का एक शिवलिंग अवतरित होता है, जो अद्भुत व आश्चर्यजनक होता है। विद्वान मानते हैं कि भगवान शंकर जब पार्वती को अमर-कथा सुना रहे थे
गुरु ही ईश्वर, ईश्वर ही गुरु
मनुष्य को किसी भी दशा में पशु नहीं कहा जा सकता है। ईश्वर की रची सृष्टि में विभिन्न प्राणियों में से एक है मनुष्य, दूसरे हैं पशु और तीसरे हैं वनस्पति। इन तीनों के भी कई विभिन्न आकार व प्रकार होते हैं, सब एक जैसे नहीं होते हैं।
विषय-वासना विष भरी है कटारी
मनुष्य के अनेक निषेधात्मक गुणों में से एक विषय-वासना अत्यंत बलवती और हठीली है। आदमी के पतन-पराभव का केवल यही एक ऐसा कारक है, जिससे सर्वथा बच निकलना बड़े-बड़े तपस्वियों, ज्ञानी-ध्यानियों के लिए भी मुश्किल पड़ जाता है।
तंत्र सिद्धि का महाकुंभ कामरूप कामाख्या
आदि-अनादि काल से भारतीय इतिहास में सौंदर्य एवं भक्ति का सार्थक समन्वय सुस्पष्ट रूप से प्रस्फुटित होता चला आ रहा है और भारतीय धर्म एवं संस्कृति की भक्ति-भावना का मूल उत्साह सच्चिदानंद के अरूप सौंदर्य को मूर्त रूप देने के प्रयासों में निहित है।
शक्तिपीठ देवी पाटन का महात्म्य
उत्तर-प्रदेश के जनपद बलरामपुर (नेपाल की सीमा से मिला हुआ) की तहसील तुलसीपुर नगर से दो कि.मी. की दूरी पर सिरिया नाले के पूर्वी तट पर स्थित सुप्रसिद्ध सिद्ध शक्तिपीठ मां पाटेश्वरी का मंदिर . .
पौराणिक चरित्र पृथु
पृथु एक सूर्यवंशी राजा थे, जो वेन के पुत्र थे। वाल्मीकि रामायण में इन्हें अनरण्य का पुत्र तथा त्रिशंकु का पिता कहा गया है। ये भगवान विष्णु के अंशावतार थे। स्वयंभुव मनु के वंशज अंग नामक प्रजापति का विवाह मृत्यु की मानसी पुत्री सुनीथा से हुआ था।
ऋषि-मुनियों की पुण्यधरा है - ऋषिकेश
चारों ओर फैली हुई हरियाली, अपरिमित सघन वन-राशि एवं स्वच्छ दूधिया जल, गहरी नीलिमा के साथ निर्मलता का अहसास कराती पुण्यमयी पवित्र सलिला भागीरथी गंगा तथा उसके चारों
पौराणिक चरित्र - द्वैमातुर
गणेश जी का एक नाम है द्वैमातुर। द्वयोर्मात्रोरपत्यं पुमान् द्वैमातुर। अर्थात दो माताओं का संतानत्व प्राप्त होने के कारण गणेश का यह नाम पड़ा। गणेश जी की एक माता पार्वती हुईं और दूसरी माता हथिनी। रंभा तथा इंद्र के क्रीड़ारत रहते . .
मंडी का अर्धनारीश्वर मंदिर
यह अर्धनारीश्वर मंदिर लगभग 900 वर्ष पुराना है, जो कि हिमाचल के मंडी शहर में स्थित है। ऐसी भव्य मूर्ति, जिसमें आधा रूप शिव का है तथा आधा पार्वती का, किसी भी मंदिर में नहीं है। सभा-मंडप के प्रवेश-द्वार पर गजब की पत्थर नक्काशी है।
भाव के भूखे होते हैं भगवान
सभी शास्त्रों तथा धर्माचार्यों के प्रवचनों का यही सार है कि भगवान केवल भाव के भूखे हैं। वे हमसे किसी वस्तु अथवा पदार्थ की कामना नहीं रखते और न ही किसी फल-फूल की अपेक्षा रखते हैं। ईश्वर तो बस कोमल भाव और प्रेम चाहते हैं
|
|