विशेष श्रेणी |
रेल का टिकट
`बाबा, दुनिया में सबसे आसान काम कौन-सा है?'
`काम न करना ही सबसे आसान काम है।'
कैसे बनती है डबल रोटी?
आजकल विश्व के लगभग सारे देशों में डबलरोटी (ब्रेड) का उपयोग हो रहा है। लेकिन आधुनिक लोगों की पसंदीदा डबलरोटी आज से नहीं सदियों पहले से अस्तित्व में है। कहते हैं कि ईसा से 3000 वर्ष पहले मिस्र में डबल रोटी की शुरूआत हुई थी।
बादशाह की पहेली
बादशाह अकबर को पहेली सुनाने और सुनने का काफी शौक था। कहने का मतलब यह कि पक्के पहेलीबाज थे। वे दूसरों से पहेली सुनते और समय-समय पर अपनी पहेली भी लोगों को सुनाया करते थे।
लिखे ईसा, पढ़े मूसा
एक गाँव
में एक मजदूर रहता था। एक बार उसे अपने गाँव में मजदूरी नहीं मिली तो वह दूसरे गाँव
में मजदूरी करने लगा। उस गाँव में मजदूरी करते-करते उसे बहुत दिन बीत गए।
क्या कहने पंगारा के
सुगंध बिखेरती, मन लुभावनी शाम को उद्यान के आसपास या गाँव की गलियों में जब आप चहल-कदमी करने निकलें, तो पंगारा के लाल रंग के फूलों की जीवंत आभा आपको मंत्रमुग्ध कर लेगी।
दो बूँद ज़िंदगी की
पोलियो क्या है?दोस्तों, यह दो बूंद जिंदगी के विज्ञापन तो हम सबको अच्छे लगते हैं, लेकिन अधिकांशत आम लोगों को समझ में यह नहीं आता कि यह पोलियो है क्या?...एक बूँद स्याही की करामात
ए ड्रॉप ऑफ इंक मे मेक ए मिलियन थिंक'' का सीधा अर्थ तो यही है कि एक बूँद स्याही से जो कुछ लिखा जाए वह अनेक पाठकों को प्रेरित कर सकता है। उनमें नई प्रेरणा, नई आशा, नई शक्ति, स्फूर्ति एवं साहस...
बिना ड्राइवर चलेगी कार
कनाडा के अपलानिक्स कारपोरेशन के राबर्ट मैक कुएग एवं फ्रैंक आरतेस ने ट्रैफिक टैक्नॉलाजी इंटरनेशनल के एक अंक के हवाले से कहा है कि कार में बैठने वाले को केवल गंतव्य स्थान के बारे में बता देना होगा और कार चल पड़ेगी।
पूँछ....कैसी-कैसी
दोस्तों, आपसे यदि कोई कहे कि कुछ जंतु पूँछ के बल खड़े हो सकते हैं, तो शायद आपको विश्वास न हो। लेकिन यह सच है। ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला कंगारू कुछ क्षणों के लिए ऐसा कर सकता है।
घड़ी की रफ्तार
वह चलता रहता है, निरंतर दिन फिर रात और फिर दिन... दोस्तों! दिन-रात की अजीब गुत्थी जब मानव मस्तिष्क में प्रश्न बनकर खड़ी हुई, तो उसने सर्वप्रथम सूर्य, चंद्रमा, ग्रहों और तारों से दोस्ती की। समय की यात्रा को नापने के लिए अक्ल दौड़ाई गई।
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