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खाओ ताजा, पकाओ ताजा
अब जमाना आ गया है कि आप हप्तों तक चूल्हा जलाए बिना अपना पेट भर सकते हैं। ऐसा मुमकिन हुआ है डिब्बाबंद खाद्य-पदार्थों की उपलब्धता से। रोटी नहीं खाना चाहते तो पाव खाइए। पाव पसंद नहीं तो तरह-तरह के बिस्कुट हाजिर हैं। गार्डेन टूल्स - ऐसे करें केयर
पेड़-पौधों से हर कोई अपने घर को सजाना चाहता है ताकि प्रकृति के ज्यादा करीब रह सके। इसलिए अगर किचन गार्डन नहीं भी है तो भी तकरीबन हर घर में गमले मिल जायेंगे। गमले में लगे पौधों की देखभाल करने की भी आवश्यकता होती है
बलात्कार की साइकोलॉजी - यह एक मनोवैज्ञानिक ट्रॉमा है
किसी भी महिला के लिए बलात्कार का शिकार होना बहुत बड़ा हादसा है। शायद उसके लिए इससे बड़ी त्रासदी कोई है ही नहीं। बदकिस्मत से अपने देश में महिलाओं से बलात्कार की दर निरंतर बढ़ती जा रही है। यह एक जघन्य अपराध है, लेकिन अक्सर गलतफहमियों व मिथकों से घिरा रहता है।
रसोई को ऐसे बनाएँ ज्यादा उपयोगी
अगर आप अपनी रसोई को सुन्दर-जीवंत और अच्छा काम करने के योग्य बनाना चाहती हैं, तो निम्न सुझावों का पालन कीजिए- भुढ़ापा बहुत कीमती होता है बच्चो
चंद रोज पहले `विश्व वृद्ध दिवस' मनाया गया था। हिन्दुस्तान में आजकल सारे ही `विश्व-दिवस' मनाए जाने लगे हैं। बाल-दिवस, श्रम-दिवस, महिला-दिवस, पिता-दिवस, मातृ-दिवस वगैरह-वगैरह।
ताकि हर दिन बने वेलेंटाइन-डे
सफल और सुखी जीवन के लिए न सिर्फ एक दिन बल्कि साल के सभी दिन वेलेंटाइन-डे के समान होने चाहिए। समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक सफल और सुखी जीवन का एक ही आधार है
कृपया ध्यान दें सुपर वुमेन छुट्टी पर जा रही हैं
हम जानते थे कि ऐसा होने जा रहा है। यह सिर्फ समय की बात थी, जब महिलाएं इस विचार के विरूद्ध खड़ी थीं कि उनका आत्म-मूल्य कॅरिअर पर निर्भर है। प्रतिष्ठित मैनेजमेंट स्कूलों में पढ़ रही . .
पार्टीज़ोन - रौनकां ही रौनकां
आखिर एक सफल पार्टी के लिए किन चीजों की जरूरत पड़ती है? आप कहेंगे- अच्छे लोगों का साथ यानी गुड कंपनी, स्वादिष्ट भोजन, अच्छी शराब और दिलों के तार झनझना देने वाला संगीत।
गुजारा भत्ता के लिए शादी जरूरी नहीं
राष्ट्रीय महिला आयोग का कहना है कि कोई औरत शादी किए बिना अगर किसी मर्द के साथ रहती है, उसे यदि मर्द छोड़ देता है तो औरत को गुजारा भत्ता मिलना चाहिए। महिला और बाल विकास मंत्रालय को भेजी गई अपनी सिफारिश में आयोग . .
लड़के-लड़कियां आखिर एक-दूसरे में क्या तलाशते हैं?
एक जमाना था, जब माता-पिता अपने बच्चों के लिए जीवन-साथी का चयन किया करते थे और बच्चे बिना किसी आपत्ति के उसे स्वीकार करके अपनी पूरी जिंदगी गुजार देते थे। यही नहीं, माता-पिता एक निश्चित आदर्श की तलाश में भी रहते थे।
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