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यदि आप वर्किंग मॉम हैं तो
ऐसा कहा जाता है कि भगवान हर जगह मौजूद नहीं हैं, इसीलिए भगवान ने मां को बनाया। वेदों, पुराणों, आध्यात्मिक पुस्तकों में मां की भूमिका के विषय में बहुत कुछ कहा गया है। मां, जो बच्चे को जन्म देती है, उसे पाल-पोसकर बड़ा करती है
भ्रूण हत्या : एक अभिशाप
संसार में मनुष्य को ही नहीं, प्रत्येक प्राणी मात्र को जीने का अधिकार है। किसी भी प्राणी के प्राणों को बलात् लूट लेना हिंसा है। भगवान महावीर ने हिंसा के दो रूप बताएँ हैं अस्थमा से सुरक्षा प्रदान करता है माँ का दूध
माता का दूध नवजात शिशुओं को अस्थमा से सुरक्षा प्रदान करता है। शोध में यह पाया गया कि जिन शिशुओं ने 9 महीने तक माता के दूध का सेवन किया, उन्हें इस रोग से सुरक्षा मिली। अस्थमा का संबंध किसी एक कारण से नहीं
आज वैज्ञानिक, औषधियों के निर्माण के लिये लगातार आविष्कार कर रहे हैं। वैज्ञानिकों को यह बात भलीभांति ज्ञात है कि प्रकृति ने मानव और जीव-जन्तुओं की प्राण-रक्षा के लिये संसार में विभिन्न जड़ी-बूटियों की उत्पत्ति भी की है।
बच्चे झूठ बोलते हैं कहीं इसमें आपका योगदान भी तो नहीं
``जॉनी, जॉनी यस पापा ईटिंग शुगर नो पापा टेलिंग लाइस नो पापा ओपन योर माऊथ हा-हा-हा।'' यह नर्सरी राइम है, जो शायद हर स्कूल में बच्चों को सिखायी जाती है।
सपनों की तस्वीर में छोटे पड़ते पापा
बात शुरू करने के पहले आइये, कुछ तथ्यों पर नजर डाल लेते हैं- भारत के इतिहास का यह पहला ऐसा दौर है जब 20 लाख से ज्यादा विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे प्रोफेशनल मौजूद हैं, जिनके घर-परिवार में उनके पहले उनकी तरह का कोई नहीं था।
साढ़े तीन वर्ष की निधि की दाहिनी आँख उभर कर बाहर को आ गई, तीन वर्षीय उधो साधू चलते हुए चीजों से टकरा जाता था तथा दो वर्षीय विघ्नेश की दाई आँख में सफेद चमक सी दिखाई पड़ती थी। ये सभी बच्चे आँख के कैंसर `रेटीनोब्लास्टोमा' से पीड़ित थे।
बाल श्रम : बच्चों से छिनता बचपन
रोडवेज बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, सब्जी मण्डी, सिनेमा हाल आदि सार्वजनिक स्थानों के आस-पास कूड़े के ढेर से कांच, लोहे, प्लास्टिक व कागज को बीनते बच्चों के झुण्ड हर महानगर-नगर में मिल जाते हैं।
ताकि झगड़ा न हो नये मेहमान और पेट्स में
आपके घर में एक नया मेहमान आने वाला है, आपका बच्चा। लेकिन आपके घर में पहले से ही पेट्स भी हैं। अब दोनों को साथ कैसे रखा जायेगा? यह एक बड़ी चुनौती है, खासकर पेट्स को आदत पड़ चुकी होती है
बच्चों पर जासूस कहां तक
अदनान नामक किशोर के मर्डर का केस अभी ताजा ही है कि आरूषि कांड आ गया। ऐसे और ना जाने कितने कांड हर दिन देश में घट रहे हैं। अदनान केस को ही लें, यदि मां-बाप को उसकी गतिविधियों, उसके फ्रैंडसर्कल के बारे में जानकारी होती तो शायद यह ट्रेजेडी होने से बच जाती।
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