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बाप - डॉ. वेणुगोपाल अग्रवाल
पत्थरों के जंगल में बेटा, सोच रहा हरियाली बाप
कुत्ता सोता है घर में, बाहर करता रखवाली बाप निदा फ़ाज़ली के दोहे
छोटा कर के देखिए, जीवन का विस्तार
आँखों भर आकाश है, बाँहों भर संसार ठहर गया जल - हितेश कुमार शर्मा
बहते-बहते ठहर गया जल
शान्त हुई जीवन की हलचल असुरक्षित - भगवानदास जोपट
ईश्वर
खलक खुदा का मुल्क बादशाह का शहर कोतवाल का दर्द मुँह खोले - दिवाकर पाण्डेय
पहले, दीवारें भी बोलती थीं,
बातें करती थीं, तभी तो अब तक ज़िंन्दा हूँ। दोहे - विज्ञान व्रत
जब से नगरी में बना, चुप रहना क़ानून।
हम जैसों की चुप्पियाँ, हुईं और बातून।। ग़ज़ल - राहत हुसैन राहत
बराबरी का ज़माना है, तुम न साथ चलो
मेरा लिबास पुराना है, तुम न साथ चलो तुम्हें क्या पेश करूँ - कन्हैयालाल शर्मा
तुम्हें क्या पेश करूँ
एक तश्तरी में पुखराज व नीलम एक तश्तरी में माणिक और पन्ना तुम्हें पेश करूँ अधिकारी वंदना - संजय कुंदन
हे अधिकारी
रहता हूँ हर पल सतर्क कि मेरी क़मीज़ न दिखे आपकी क़मीज़ से ज्यादा सफ़ेद गीत - शतदल
कल अचानक गुनगुनाते चीड़वन जलने लगे
और उसके पाँव से लिपटी नदी बहती रही! |
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