कामिका एकादशी व्रत श्रीहरि-हर की करें एक साथ पूजा
तिथि व्रत
तिथि मुहूर्त: पाम पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 20 जुलाई, रविवार की दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से शुरू हो रही है, जो 21 जुलाई, सोमवार की सुबह 9 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई को रखा जाएगा।
व्रत पारण: 22 जुलाई, मंगलवार की सुबह 5 बजकर 37 मिनट से सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक।
शुभ योग: 21 जुलाई, सोमवार की सुबह 5 बजकर 53 मिनट से 22 जुलाई, मंगलवार की दोपहर 12 बजकर 8 मिनट तक गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमफत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। एकादशी तिथि की सुबह से देर रात 12 बजकर 8 मिनट तक पुष्य नक्षत्र रहेगा। इस बार कामिका एकादशी पर भद्रा दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से लगेगी, जो देर रात 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। हालांकि भद्रा के कारण एकादशी व्रत और पूजा में कोई बाधा नहीं आएगी।
सावन का महीना भगवान शिव को और एकादशी तिथि श्रीहरि को समर्पित है। इस महीने में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि सोमवार को है, जिस कारण इस एकादशी का महत्व अधिक हो गया है। अत सावन की कामिका एकादशी को हरि यानी भगवान विष्णु के साथ हर यानी भोलेनाथ की पूजा का विशेष संयोग बन रहा है। कामदा एकादशी को लक्ष्मी-नारायण तथा शिव-पार्वती की पूजा करें।
महत्व
सावन सोमवार को भोलेनाथ के भक्त शिव का अभिषेक करते हैं और एकादशी तिथि को श्रीहरि के निमित्त व्रत रखते हैं। ऐसे में इस एकादशी को श्रीहरि-हर की एक साथ पूजा करने का अवसर मिलेगा, जिससे साधकों के जीवन में चल रही परेशानियों का अंत होगा।
उन्हें सुख, संपत्ति, सौभाग्य, धन-धान्य की प्राप्ति होगी। इस एकादशी का व्रत रखकर भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा एक साथ करने से घर में सुख- समृद्धि की वृद्धि होगी। इस दिन सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होंगी।
पूजा विधि
दैनिक नित्य कर्म करने के बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र पहनें। एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति रखें। पीले फूल, फल, धूप, दीप, चंदन और नैवेद्य आदि अर्पित करके पूजा करें। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और फिर उनकी आरती करें। यदि कोई मनोकामना है, तो उसे सच्चे दिल से भगवान के सामने कहें। भगवान विष्णु का स्तुति मंत्र
शांताकारं भुजंगशयनं, पद्मनाभं सुरेशं,
विश्वाधारं गगनसदृशं, मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं, योगिभिर्ध्यानगम्यम्,
वन्दे विष्णुं भवभयहरं, सर्वलोकैकनाथम्।।
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अर्थात- जो शांत स्वरूप वाले हैं, जो आदिशेष सर्प पर विराजमान हैं, जिनकी नाभि पर कमल है, जो देवताओं के स्वामी हैं, जो ब्रह्मांड को धारण करते हैं, जो आकाश के समान असीम और अनंत हैं, जिनका रंग मेघ के समान नीला है और जिनका शरीर सुंदर एवं शुभ है, जो देवी लक्ष्मी के पति हैं, जिनके नेत्र कमल के समान हैं और जो ध्यान द्वारा योगियों को प्राप्त हो सकते हैं, उन विष्णु को नमस्कार है, जो संसार के भय को दूर करते हैं और जो समस्त लोकों के स्वामी हैं।
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