दुष्प्रचार से सावधान रहें अंशधारक : रमेश कुमार बंग
हैदराबाद, आ.प्र. महेश को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड के रविवार, 7 दिसंबर को होने वाले चुनाव को लेकर संस्थापक पैनल की काचीगुड़ा स्थित घनश्याम पटेल भवन में जन समर्थन सभा को संबोधित करते हुए रमेश कुमार बंग ने कहा कि इस बार भी आपका विश्वसनीय संस्थापक पैनल ने अनुभवी एवं युवा प्रत्याशियों को सेवा का कार्य करने का अवसर दिया है। आशा है सदा की भांति आपका अमूल्य सहयोग एवं समर्थन मिलता रहेगा।

















रमेश कुमार बंग ने कहा कि विपक्षी पैनल द्वारा झूठ, निराधार व भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। सच्चाई यह है कि 2005 से 2020 तक संस्थापक पैनल के नेतृत्व में आपके आशीर्वाद से निदेशक मण्डल का गठन हुआ, जिसमें 2005 से 2010 तक विपक्ष के चयनित बंधुओं को संग रखकर पदों का दायित्व प्रदान किया गया। सभी ने संस्था के हित को प्राथमिकता दी। 2020 में विपक्ष के पाँच बन्धु सहित कुल 15 निदेशकों का चयन हुआ।
आपसी सद्भाव से मिलजुल कर संस्था के संचालन का कार्य उत्तरोत्तर प्रगति के बजाय विद्वेष से सराबोर होकर शेयर होल्डर्स वेल्फेयर असोसिएशन नामक संस्था की आड़ में अनाप-शनाप व निराधार आरोप लगाकर निदेशक मंडल को सुचारू कार्य करने से रोकने का कार्य अदालत के माध्यम से किया गया। साथ ही अन्य सरकारी महकमों में शिकायतों का अंबार लगा दिया गया। यहाँ तक कि ऋण देने की दैनिक व्यावसायिक गतिविधि पर रोक के चलते निदेशक मण्डल के अधिकारों को कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी को प्रदान करने में इन्हीं का हाथ है, जिसके चलते संस्था का कारोबार घटा व इसकी साख पर भी चोट लगी।
रमेश कुमार बंग ने कहा कि सांच को आंच नहीं। भगवान महेश की कृपा से इन झूठे, निराधार व विद्वेषपूर्ण आरोपों में से आज तक एक भी सिद्ध नहीं हुए। वह महज आरोप ही रह गए। मुझे हर संभव तरीके से प्रताड़ित करने की साजिशें रची गयीं। विपक्ष के कुकृत्यों से बैंक को बहुत हानि हुई है। साथ ही उसकी साख को गहरी चोट भी पहुँची है। 300 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा गया कि उक्त राशि के ऋण अवैध या वक्फ या इल लीगल कोलैटरल के एवज में दिया गया, जबकि हकीकत यह है कि आरबीआई ने अपनी जाँच में रत्ती भर के घोटाले का भी प्रमाण नहीं पाया।
गलत व भ्रामक प्रचार के चलते तोड़ी मरोड़ी गई रिपोर्ट का हवाला देकर बैंक को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि विपक्ष के 5 निवेशकों द्वारा बोर्ड की बैठकों में भाग नहीं लिया गया और सहयोग करने के बजाय झड़प व विरोध का कार्य किया गया। विपक्षी इस सच्चाई से क्यों परहेज कर रहे हैं। इस बात को भी प्रकट क्यों नहीं किया जा रहा है। किसी भी जाँच में बिना सेक्युरिटी के ऋण देने का एक भी मामला उजागर नहीं हुआ।
झूठ के सिवाय विपक्ष के पास कोई सकारात्मक मुद्दा नहीं
कोई भी बैंक के केंद्रीय कार्यालय में जाकर इसका सत्यापन कर सकता है। हमारा पिछला रिकॉर्ड 2005 से 2020 तक का उपलब्धियों से भरा है। हमने बैंक के केंद्रीय कार्यालय के लिए विशाल भवन का निर्माण कराया एवं सतत लाभांश दिया। साथ ही शेयर की बुक वैल्यू में वृद्धि की। क्या भवन निर्माण के संबंध में निराधार आरोप लगाना सही है? जबकि ना तो आरबीआई द्वारा और ना ही अन्य जाँच में इसका उल्लेख किया गया है।
सन् 2020 के पश्चात रिजर्व बैंक ने लगभग 4 निरीक्षण किए, जिसमें तकनीकी त्रुटियों जो कि बड़े से बड़े बैंक में भी पाई जाती है, के सिवाय किसी घोटाले या गबन का कोई भी मामला नहीं पाया गया है। लगातार शिकायतों के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने दो वर्षों के लिए एक अधिकारी को अतिरिक्त निदेशक के रूप में मनोनीत किया था। उक्त अधिकारी ने समय-समय पर निदेशक मण्डल की बैठकों में भाग भी लिया था। उक्त अधिकारी द्वारा भी कोई टीका टिप्पणी नहीं की गयी।
रिजर्व बैंक ने उनके कार्यकाल का समय पूर्ण होने पर विस्तार नहीं दिया, यानि बैंक में यदि कुछ घपला होता तो क्या रिजर्व बैंक उनको वापस बुला लेता? इससे यही साबित होता है कि झूठ व झूठ के सिवाय विपक्ष के पास और कोई सकारात्मक मुद्दा ही नहीं है।
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रमेश कुमार बंग ने झूठे आरोपों को बैंक की साख पर हमला बताया
रमेश कुमार बंग ने कहा कि लोगों को भ्रमित कर बैंक की छवि को धूमिल करने से विपक्ष के अहं की पुष्टि तो हो सकती है, लेकिन क्या बैंक को कुछ लाभ होगा? क्या बैंक का हितैषी बैंक के भले व व्यवसाय में वृद्धि करने के लिए बैंक की ही साख को चोटिल करते हुए घोटाले व घपले जैसे निराधार आरोपों को बार-बार दोहराएगा? यह आपको सोचना है। मेरा मानना है कि अंशधारक जागरूक हैं और ऐसे झूठे व निराधार आरोपों वाले प्रचार से भ्रमित ना होकर सच्चाई को जानकर उन्हें उचित सबक सिखाएँगे एवं सच्चाई का साथ देंगे।
लक्ष्मीनारायण राठी ने कहा कि राजस्थान की 36 कौम के आशीर्वाद से वर्ष 2005 से 2020 तक महेश बैंक ने 4500 करोड़ का व्यापार किया। किसी व्यक्ति विशेष के नाम से डिपॉजिट महेश बैंक का व्यापार इतना बड़ा नहीं हुआ। महेश बैंक के सभी दस हजार से करोड़ों रुपये के डिपॉजिटरों को सम्मान मिला है। 2005 में रमेश कुमार बंग ने जब बागडोर संभाली, उस समय बैंक का व्यापार 500 करोड़ का था और 4,500 करोड़ तक पहुँचा।
वर्ष 2020 के बाद विपक्षी पैनल के पाँच निदेशकों ने उसको प्रभावित किया। रमेश कुमार बंग ने बैंक का कोई यूज नहीं किया। जबकि विपक्षी बता रहे हैं कि साल का 10 लाख खर्च किया, जो सही नहीं है। इसलिए अंशधारक सावधान रहें, भ्रमक प्रचारों में न आएँ और संस्थापक पैनल के सभी प्रत्याशियों को जिताएँ। पुरुषोत्तम मानधना ने कहा कि विपक्षी विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं। इसका मैं भी शिकार बना। बैंक में देखो पैसा है।
बैंक की तरक्की के लिए 14 प्रत्याशियों को भारी बहुमत से जिताएँ
हमने चिर परिचित दोस्तों, रिश्तेदारों से लोन लेने को कहा। कुछ लोगों ने लोन लिया, वाजबी लोन थे, उसमें समस्या नहीं थी, लेकिन इनकी शिकायत से आरबीआई जाँच हुई। इसके चलते मैं भी प्रभावित हुआ। लोन के बारे में शिकायत नहीं है, लेकिन कार्पोरेट गवर्नेंस के मामले में विक्टिम बना। मैंने इसके लिए वित्त मंत्रालय में अपील की है, जो पेंडिंग है। उन्होंने कहा कि कई संस्थापक पैनल के विरोध में कई वीडियो आये हैं, लेकिन आप भ्रमित न हों। विपक्षी पैनल प्रोफेशन की बात करता है, जबकि उनमें एक भी प्रोफेशनल प्रत्याशी नहीं हैं। संस्थापक पैनल में दो-दो प्रोफेशनल प्रत्याशी हैं। नीतिगत व्यापार करने वालों का इस पैनल में समावेश है। बैंक की तरक्की के लिए 14 प्रत्याशियों को भारी बहुमत से जिताएँ।
ओमप्रकाश टावरी ने कहा कि पिछले पांच साल में जिन्हें वोट दिया, जिनको चयनित कर कार्य के लिए भेजा, उसने क्या किया यह सब आप जानते हैं। हमें यह सोचना है कि किसकी गलती से बैंक का कार्य प्रभावित हुआ। यदि हम इस पर सहजता से विचार करेंगे तो आसानी वोट का उपयोग 7 दिसंबर कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति विशेष से द्वेष है, तो हम उसे क्षति पहुँचाने के लिए क्या संस्था को नुकसान पहुँचाएँगे। यदि संस्था पर चोट करेंगे, तो फिर वोट पाने का हकदार रहेगा या नहीं।
सभा में अनेक अंशधारकों व पदाधिकारियों की रही उपस्थिति
चेयरमैन पद के प्रत्याशी सीए मुरलीमनोहर पलोड़ ने कहा कि इससे पहले 15 प्रत्याशियों का चयन करने के लिए एक ही बैलेट का उपयोग होता था। इस बार चुनाव में परिवर्तन है। सामान्य वर्ग में हमें 12 पुरुषों को वोट देना है, जिसका अलग पेपर रहेगा और महिला वर्ग में 2 का चयन करना है। इसलिए ध्यान रखें। संस्थापक पैनल का अतीत गौरवशाली रहा है। यह एक ऐसा पैनल है, जिसने विकास करके दिखाया है। ऐसा पैनल है, जो वादे किये उसे पूर्ण किया।
हम लोग विजन लेकर चल रहे हैं, बैंक की जो साख पिछले पाँच साल में खोई है, जो व्यापार खोया है, उसे आने वाले वर्षों में पुन वापस लाया जाएगा। इस कार्यकाल में बैंक के व्यापार को 7000 करोड़ तक ले जाएँगे। मत का प्रयोग सोच समझकर करें और संस्थापक पैनल को जिताएँ। विनीत वर्मा, अदिति राठी, प्रत्याशी रूपेश सोनी, दीपक कुमार बंग, श्याम बाहेती, अल्का झँवर ने अपने विचार रखते हुए पैनल को पूर्ण रूप से जिताने का अंशधारकों से आग्रह किया। कार्यक्रम का संचालन सीए कन्हैयालाल राठी ने किया।
अवसर पर रामप्रकाश भंडारी, श्रीनिवास असावा, किशनगोपाल मणियार, सीए बजरंगलाल झँवर, प्रेम कुमार बजाज, ब्रिजगोपाल असावा, कमल नारायण राठी, हरिनारायण राठी, पुष्पा बूब, श्रीगोपाल बंग, सीएस सुमन हेडा, सुमित्रा राठी, प्रत्याशी अमित लड्डा (गग्गु), देवेन्द्र झँवर, गोविन्द नारायण राठी, कैलाश मंत्री, मनोज लोया, मुकुन्दलाल बाहेती, पवन कुमार लोहिया, विनोद कुमार बंग, कविता तोष्णीवाल सहित अन्य उपस्थित थे।
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