सिगाची ब्लास्ट के पीड़ित परिवारों को दिया गया 42 लाख का मुआवजा, हाईकोर्ट में कम्पनी ने दी जानकारी

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय में सिगाची कंपनी की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया कि सिगाची कंपनी में हुए विस्फोट में मारे गए लोगों के परिवारों को 42 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सिगाची घटना की जाँच की प्रगति और पीड़ितों के परिवारों को दिए जाने वाले मुआवजे के संबंध में विस्तृत जानकारी पेश करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के चलते राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित अधिकारी इस घटना की सभी पहलुओं से जाँच कर रहे हैं और जाँच अंतिम चरण में चल रही है। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान नहीं हो पाई है।

तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन ने बुधवार को हैदराबाद निवासी के बाबू राव द्वारा इस मामले को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में संगारेड्डी ज़िले के पाशा मैलारम स्थित सिगाची कारखाने में रिएक्टर विस्फोट की घटना की जाँच विशेष जाँच दल द्वारा करवाने का आदेश देने का आग्रह किया गया था। इस घटना में 54 लोगों की मौत हुई और 8 लोग अभी लापता है। इसके अलावा 28 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

सिगाची विस्फोट मामले में सीईओ अमित राज सिन्हा गिरफ्तार

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता टी. रजनीकांत रेड्डी ने दलील देते हुए कहा कि इस मामले में दूसरे नंबर के आरोपी सिगाची के सीईओ अमित राज सिन्हा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और 5 अन्य आरोपी फरार है। उन्होंने बताया कि सरकारी अधिकारियों समेत कई लोगों से पूछताछ की गई है। उन्होंने कहा कि अब तक की जाँच में यह पता नहीं चल पाया कि अपराध किसने किया।

रजनीकांत रेड्डी ने बताया कि जाँच अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है और शीघ्र ही इस मामले को लेकर अदालत में आरोप-पत्र दायर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तक पीड़ितों के परिवारों को 22 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है और जिन 8 मजदूरों का कोई पता नहीं चल पाया है, उनके मृत्यु प्रमाण-पत्र उनके परिवारों को सौंप दिए गए हैं। इनके परिवारों के सदस्यों को भी मुआवजा दिया जा चुका है।

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वरिष्ठ अधिवक्ता ने एयर इंडिया हादसे से तुलना कर दी

कंपनी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एस. निरंजन रेड्डी ने दलील देते हुए कहा कि अहमदाबाद में हुए हालिया एयर इंडिया विमान हादसे में, जिसमें 241 लोगों की जान चली गई, पुलिस ने इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया, जबकि सिगाची के मामले में इसके सीईओ को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने निवेदन किया कि इस जनहित याचिका का उनकी जमानत याचिका पर कोई प्रभाव न पड़े और उचित आदेश जारी किए जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों के परिवारों को कानून के तहत देय मुआवजे के साथ कुल 42 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है और इस आदेश में कंपनी की ओर से 42 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वसुधा नागराज ने दलील देते हुए कहा कि दुर्घटना के समय प्रबंधन द्वारा एक करोड़ रुपये के मुआवजे के आश्वासन के विपरीत केवल 42 लाख रुपये का भुगतान करना अनुचित है। दलील सुनने के पश्चात खण्डपीठ ने कहा कि सीईओ की जमानत याचिका का इस जनहित याचिका से कोई संबंध नहीं है। खण्डपीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की खूबियों पर विचार नहीं किया जा रहा है। खण्डपीठ ने याद दिलाया कि जनहित याचिका पीड़ितों के परिवार को मुआवजा के भुगतान से संबंधित है। वर्तमान जाँच से पता चला है कि मुआवजे के विवरण पर विचार किया जा रहा है। खण्डपीठ ने सरकार को आगामी 29 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान अन्य विवरणों पर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए।

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