आरोप के घेरे में पुराने शहर का एक एसीपी
हैदराबाद, खुद को दलित बताने वाली महिला ने आरोप लगाया कि साउथ जोन में तैनात सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) उसे लैंगिक रूप से प्रताड़ित कर डरा-धमका रहा है। पुराने शहर में लोकल मीडिया से बात करते हुए महिला ने बताया कि एसीपी अपनी कार उसके घर के ठीक सामने पार्क कर उसे परेशान कर रहा है। पीड़िता ने बताया कि 10 जून को उसने आदित्य जैन और दो अनजान महिलाओं के खिलाफ लैंगिक प्रताड़ना और उसकी इज्जत पर हमला करने की शिकायत दर्ज कराई थी, पुलिस ने प्राथमिकी तो दर्ज कर ली, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।
पीड़िता वही महिला है, जिसने एसीपी के बर्ताव पर वीडियो जारी किया था, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि वह फोन पर अश्लील मैसेज भेजकर उसे परेशान कर रहा है, उसने यह भी आरोप लगाया कि उसने उसे अकेले आकर उसके साथ समय बिताने के लिए कहा और भरोसा दिलाया कि उसे इंसाफ मिलेगा।
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डीसीपी ने जांच में आरोपों को झूठा और भ्रामक बताया
जब एसीपी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने आरोपों से इनकार किया और कहा कि जो महिला एससी समुदाय की नहीं है, वह उन पर जैन के खिलाफ एससी एसटी प्रताड़ना निरोधक अधिनियम के तहत अत्याचार का मामला दर्ज करने का दबाव डाल रही थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से उसकी जाति के बारे में पूछताछ की और पाया कि उसका पति और 13 साल का बेटा एससी समुदाय का है, लेकिन महिला दूसरे समुदाय की है, जिसकी वजह से वह झूठे आरोप लगा रही है।
जब दक्षिण जोन के पुलिस उपायुक्त किरण खरे से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने खुद जाँच की और यह साबित हो गया है कि महिला द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला पुलिस अधिकारियों पर आदित्य जैन के खिलाफ एससी एसटी प्रताड़ना निरोधक अधिनियम के तहत अत्याचार का मामला दर्ज करने का दबाव डाल रही थी। एसीपी ने समझाया कि यह संभव नहीं है, क्योंकि वेरिफिकेशन के बाद पता चला है कि उसका एससी या एसटी जाति से कोई संबंध नहीं है। इस कारण वह बदले की भावना से झूठे आरोप लगा रही है।
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