ईरान पर हमला इज़राइल की सुरक्षा को मजबूती नहीं मिल सकेगी
इज़राइल, 13 जून 2025 को इज़राइल ने “ऑपरेशन राइजिंग लायन” के तहत ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की, जिसमें तहरान, तब्रिज, और नटांज़ में विशाल क्षति हुई । इस हमले में ईरानी आज़ादी सेनानियों के जन-आवासीय क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचा, जिससे नागरिकों की जान जोखिम में पड़ी । इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू का कहना है कि यह हमले ‘आत्मरक्षा’ के तहत जरूरी थे क्योंकि उनका मानना है कि ईरान परमाणु हथियारों के करीब था ।
संकट का व्यापक प्रभाव
घरेलू राजनीति में इस कदम का गहरा असर था: विपक्षी नेता और नागरिक भी नेतन्याहू के साथ खड़े हो गए और उन्होंने ‘राष्ट्रीय एकता’ की झलक दिखाई । प्रतिवाद में ईरान ने भारी मिसाइलों से जवाब दिया, जिससे बेतयाई स्थिति उत्पन्न हो गई अमेरिका, फ्रांस, और जर्मनी ने इज़राइल को रक्षा का अधिकार देते हुए भी दीर्घकालिक हल की अपील की लेकिन वैश्विक तेल बाजार और राजनीतिक स्थिरता पर ध्रुवीय प्रभाव बना रहा ।
हालांकि यह हमला परोक्ष रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कुछ समय के लिए बाधित कर सकता है, विशेषज्ञों का मानना है कि इसका दीर्घकालिक रणनीतिक असर सीमित रहेगा । नेतन्याहू की लोकप्रियता भले बढ़ी हो, लेकिन सीधी लड़ाई इज़राइल की सुरक्षा को गहराई से मजबूत नहीं कर पाएगी।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



