पीएसीएस पर्सन-इन-चार्ज नियुक्ति को चुनौती, सरकार को नोटिस

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश जारी कर प्रश्न किया है कि राज्य भर में प्राइमरी एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी (पीएसीएस) के लिए अधिकारियों को पर्सन-इन-चार्ज क्यों नियुक्त किया गया। सरकार को एक अवमानना याचिका को लेकर नोटिस जारी की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पिछले आदेशों के विपरीत पर्सन-इन-चार्ज नियुक्त किए गए थे।

सरकार ने 19 दिसंबर को पीएसीएस के लिए अधिकारियों को पर्सन-इन-चार्ज नियुक्त करने के लिए सरकारी आदेश संख्या 597 जारी किया था। इसे चुनौती देते हुए कई याचिकाएँ दायर की गई, जिनमें कहा गया है कि पर्सन-इन-चार्ज को उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद नियुक्त नहीं किया जा सकता है और केवल चुने गए लोगों को ही पर्सन-इन-चार्ज नियुक्त किया जाना चाहिए। इन याचिकाओं पर, उच्च न्यायालय ने पहले यथास्थिति बनाए रखने के लिए अंतरिम आदेश जारी किए थे।

सरकारी आदेश पर सुनवाई 9 फरवरी को

याचिकाकर्ताओं ने अदालत की अवमानना की याचिका दायर की है, जिसमें दावा किया गया है कि अदालत के आदेशों के बावजूद सरकार द्वारा सरकारी आदेश संख्या 597 जारी कर पर्सन-इन-चार्ज नियुक्त करना अदालत की अवमानना है। उच्च न्यायालय की न्यायाधीश जस्टिस पी. माधवी देवी ने हाल ही में रुद्रारम प्राइमरी एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी (पीएसीएस) के चेयरमैन बी. पांडू की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें सरकारी आदेश संख्या 597 को चुनौती दी गई थी।

प्रतिवादियों, कृषि सहकारिता विभाग के आयुक्तों और अन्य को नोटिस जारी किए गए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि सरकार ने उच्च न्यायालय के पहले जारी यथास्थिति के आदेशों के विपरीत सरकारी आदेश जारी किया जो अदालत की अवमानना है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि पीएसीएस के चुनाव होने तक पुराने शासक वर्ग को जारी रखने के संबंध में सरकार को आदेश जारी करे। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि इस विवाद के अदालत में विचाराधीन रहने के दौरान सरकारी आदेश जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।उच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी तक स्थगित कर दी।

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