जीवनरक्षक जड़ी-बूटी से कम नहीं है, ऐश गार्ड या सफेद पेठा
ऐश गार्ड या सफेद पेठा, जिसके हिन्दी में और भी कई नाम है। मसलन, कुम्हड़ा, राख लौकी, विंटर मेलन आदि। आयुर्वेद में इसे कूष्मांड कहा जाता है और जीवनरक्षक फल की संज्ञा दी गई है। हाल-फिलहाल में इसकी बाज़ार में बहुत ज़्यादा पूछ बढ़ी है। इस पर दर्जनों शोध हुए हैं और यह न सिर्फ अनेक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए मशहूर हुआ है, बल्कि उससे कई गुना ज़्यादा इसे औषधीय फल या सब्ज़ी के रूप में ख्याति मिली है।

आषाढ़ खत्म होते और सावन की शुरुआत में ही इसकी बुआई करते हैं जिससे सर्दियाँ आते-आते इसकी बेलें फलों से लद जाती हैं। आइए औषधीय सब्ज़ी या फल का दर्जा प्राप्त कर चुके इस सफेद पेठे के स्वास्थ्य संबंधी उपयोग पर एक नज़र डालें-
जीवनरक्षक फल
आयुर्वेद में सैकड़ों साल से उपयोगी और औषधीय फल या सब्ज़ी के रूप में मान्यता पाने वाले सफेद पेठे या ऐश गार्ड (बेनिनकासा हिस्पिडा) को अब जीवनरक्षक फल की भी संज्ञा मिल गई है। यह शरीर की ऊष्मा को संतुलित कर मानसिक संतुलन बनाये रखता है। यह इन दिनों काफी उपयोगी साबित हो रहा है, क्योंकि शारीरिक बीमारियों से कहीं ज़्यादा मानसिक बीमारियाँ बढ़ गई हैं।
बाज़ार में सफेद पेठे की माँग काफी बढ़ गई है। इसे फल या सब्ज़ी की तरह ही नहीं बल्कि करीब चार दर्जन से ज़्यादा तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। इसे रसायन और पाचन सुधाकर यानी टॉनिक के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह त्रिदोष नाशक है। विशेषकर कफ के विकारों में अत्यधिक उपयोगी है।
सफेद पेठे के फायदे

यह हल्का, ठंडा और पचने में आसान होता है। एसिडिटी, गैस, अपच जैसी समस्याओं में इसका इस्तेमाल राहत देता है।आयुर्वेदिक रसों में इसे पाचक औषधीयों के साथ मिलाकर पेट की बीमारियों के लिए दिया जाता है। यह तनाव, चिड़-चिड़ापन, अनिद्रा जैसी स्थितियों में बेहद लाभकारी है। ब्राह्मी, शंकपुष्पी जैसी पारंपरिक हर्ब के साथ इसका रस मेडिटेशन करने वालों या ध्यान साधकों को दिया जाता है। साथ ही इसे सात्विक भोजन का विशेष हिस्सा माना जाता है।
डायबिटीज में भी कारगर
सफेद पेठे या विंटर मेलन में प्राकृतिक शर्करा नहीं होती। साथ ही यह पाचन में बहुत सहायक होता है और ब्लड-शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है। यही कारण है कि इन दिनों लौकी से ज़्यादा डायबिटीज के रोगी सफेद कुम्हड़े का जूस या सूप पीने को प्राथमिकता देते हैं। त्वचा और बालों के लिए भी इसका इस्तेमाल बहुत उपयोगी है। वास्तव में इसका रस झुलसने, फोड़े-फुँसियों, दाद-खाज और त्वचा की दूसरी परेशानियों में लगाया जाता है।
डैंड्रफ और स्कैल्प की खुजली में इसके रस को नारियल के तेल में मिलाकर इस्तेमाल करने से बहुत फायदा मिलता है। साथ ही यह गर्मी और लू से बचाता है, क्योंकि इसकी प्रकृति शीतल होती है। नतीजतन, यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है। गर्मियों में लू से बचने के लिए इसका रस, मिश्री और तुलसी के साथ पिलाया जाता है।
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यह कैंसर निरोधक गुणों से भी भरपूर है। हाल के कई अनुसंधानों से पता चला है कि इसमें एंटी ऑक्सीडेंट और कैंसररोधी तत्व होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स को बेअसर करते हैं। विशेषकर इसमें पेट के कैंसर के रिस्क को कम करने में जबर्दस्त क्षमता पायी गई है।
वजन घटाने में कारगर
जिन लोगों को वजन घटाना हो, उनके लिए सफेद पेठा बहुत काम का है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और इसका सेवन करने से लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है। ऐसे में वजन घटाने के लिए डायटिंग करने वालों के लिए यह परफेक्ट सब्ज़ी है। शरीर को बल देने और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले गुण भी इसमें होते हैं, इस कारण आज बाज़ार में कई ऐसे टॉनिक आ चुके हैं, जिनमें ऐश गार्ड का उपयोग किया जाता है।

कूष्मांड, गैस, एसिडिटी, अल्सर और मानसिक रोगों के लिए उपयोगी है और इसका शुद्ध रस उल्टी आने, बुखार होने और एसिडिटी में सहायक होता है। इसलिए आज ऐश गार्ड सिर्फ सब्ज़ी नहीं है बल्कि आयुर्वेद के नज़रिये से एक बहुगुणी औषधि है, जिसका नियमित इस्तेमाल आपको मानसिक, पाचन-संबंधी, त्वचा और संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी साबित होता है। इसलिए यह सिर्फ सब्ज़ी या फल नहीं, बल्कि एक कुदरती औषधी है।
इसे उगाना बहुत आसान है। जून के अंत में और जुलाई के मध्य तक सफेद पेठा या कुम्हड़ा की बुआई कर सकते हैं। बेल वाली यह सब्ज़ी या फल भारत के हर इलाके में उगायी जा सकती है। इसे गर्म और आर्द्र जलवायु पसंद है। आगरा का पेठा इसी से बनता है। दक्षिण भारत में यह अक्तूबर-नवंबर के महीने में भी उगाया जाता है।
-रेखा देशराज
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