भूलों की क्षमा माँगना ही पर्युषण का मूल मंत्र : ललितप्रभजी
हैदराबाद, ललितप्रभ सागरजी ने कहा कि तीर्थंकरों का महान चरित्र केवल सुनने के लिए नहीं है, अपितु स्वयं का चरित्र बनाने के लिए हम महापुरुषों के चरित्र का श्रवण करते हैं। अगर हमें भगवान को पाना है, तो खुद को राजुल, चंदनबाला और मीरा बनाना पड़ेगा। हमारा हृदय अगर राजुल और मीरा जैसा है तो भगवान हमारे पास और हमारी हर सांस में हैं। हम खुद को चंदनबाला बनाएँ, महावीर अपने आप मिल जाएँगे। उक्त उद्गार नुमाइश मैदान में लोक कल्याणकारी चातुर्मास समिति, त्रयनगर, हैदराबाद द्वारा आयोजित 53 दिवसीय प्रवचन माला के 52वें दिन तीर्थंकरों का महान जीवन दर्शन, युग प्रभावी आचार्य एवं साधु समाचारी विषय पर प्रवचन देते हुए राष्ट्र संत श्री ललितप्रभ सागरजी ने दिये।
आचार्यों से सीखें समता, क्षमा और धर्म का महत्व
समिति के अध्यक्ष प्रदीप सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूज्यश्री ने कहा कि भगवान महावीर का जीवन हमें उत्कृष्ट तप त्याग के साथ जीना सिखाता है। भगवान पार्श्वनाथ का जीवन मन में समता धारण करने की प्रेरणा देता है। भगवान नेमिनाथ का जीवन हमें दया और करुणा से ओतप्रोत होने की शिक्षा देता है। भगवान आदिनाथ हमें कर्मयोग और ज्ञान योग को अपनाने के लिए उत्साहित करते हैं। संतप्रवर ने कहा कि हमारे महान आचार्यों ने शासन का गौरव बढ़ाया है। लाखों लोगों को उन्होंने अहिंसक और व्यसन मुक्त जीवन जीने का रास्ता दिखाया है। जिनका आचार मानव समाज के लिए आदर्श होता है, संसार में वे ही आचार्य कहलाते हैं।
आचार्यों का जीवन हमें सिखाता है कि तुम सूरज भले ही न बन पाओ, पर दीपक बनकर तो अपने आसपास का अंधेरा अवश्य दूर कर सकते हो। पूज्य प्रवर ने कहा कि हमें पर्युषण पर्व की आराधना करते हुए इसके अंतिम चरण में स्वयं के द्वारा जाने अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा अवश्य माँग लेनी चाहिए। घर कितना भी साफ हो, धूल तो जम ही जाती है और इंसान कितना भी अच्छा हो, भूल तो हो ही जाती है। क्षमा यज्ञ है, धर्म है, शांति है, समाधान है। मन में गाँठ बांध कर रखने की बजाय हमें क्षमा मांग कर और क्षमा देकर वैर-विरोध की गाँठों को खोल लेना चाहिए। क्षमा ही पर्युषण पर्व का सार है।
पर्युषण में क्षमा, प्रेम और समाज सेवा का संदेश
पूज्यश्री ने आगे कहा कि पर्युषण के अंतिम दिन संवत्सरी को हमें जहां उपवास करके अपने शरीर और इन्द्रियों की शुद्धि करनी चाहिए, वहीं प्रतिक्रमण करके अपने दोषों के लिए क्षमा प्रार्थना कर लेनी चाहिए। आंतरिक शुद्धि ही पर्युषण का पावन संदेश है। म.सा. ने कहा कि अगर कभी बड़े डांट लगा लें तो बुरा न मानें, यह सोच कर कि बड़े नहीं डाटेंगे तो कौन डांटेगा और अगर छोटों से गलती हो जाए तो हमें यह सोचकर गुस्सा नहीं करना चाहिए कि छोटो से गलती नहीं होगी तो किससे होगी।
अगर व्यक्ति माफी मांगना और माफ करना सीख जाए तो यह धरती जन्नत बन जाए। दिल में लव फैक्ट्री खोलने की नसीहत देते हुए संत प्रवर ने कहा कि आप केवल घरवालों से ही प्रेम न करें, वरन सबसे प्रेम करें। जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है उनसे विशेष प्रेम करें। अपनी बेटी की शादी में एक करोड़ का खर्चा करने की बजाय 90 लाख का खर्चा करें और बचे हुए 10 लाख से 10 गरीब बेटियों की शादी करवाएं तो वह बेटियां आपको सदा भगवान तुल्य मानकर सम्मान देंगी। दीपावली पर स्टाफ को केवल सामान ही न दें वरन उसे गले लगाकर सम्मान भी दें, केवल अपने बेटे को ही न पढ़ाएं वरन गरीब पड़ोसी के बेटे को पढ़ा कर उसे भी पाँवों पर खड़ा करने का सौभाग्य लें।
संवत्सरी महापर्व की तैयारी और सामूहिक प्रतिक्रमण
अवसर पर डॉ. मुनि शांतिप्रिय सागरजी ने नवकार महामंत्र की सामूहिक प्रार्थना करवाई। लाभार्थी परिवार अमरचंद कांतिलाल उमेश कुमार सुमित कुमार मयन कुमार दक्ष रिधम चिरांश बागरेचा परिवार और केवलचंद अमित कुमार सुमित कुमार आर्यन कुमार योगीराज संयम मुणोत परिवार द्वारा भगवान महावीर की मूर्ति के समक्ष माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया गया। सभी का स्वागत विमल कुमार नाहर, मोतीलाल भलगट, उमेश बागरेचा, प्रदीप सुराणा, अमित मुणोत, पवन कुमार पांडया, नवरतनमल गुंदेचा, अशोक कुमार नाहर, माणक चंद पोकरणा, विमल मुथा, शोभा देवी नाहर, शोभा रानी भलगट, दीपिका बागरेचा, आरती सुराणा, शीतल मुणोत, सूरज देवी गुंदेचा, लाड़ कंवर नाहर, ललिता पोकरणा, सविता मुथा ने किया।
अवसर पर मनीष कावड़िया परिवार द्वारा श्रद्धालुओं को गुरुदेव का साहित्य उपहार में प्रदान किया गया। मंच संचालन संयोजक नवरतनमल गुंदेचा और महामंत्री अशोक कुमार नाहर ने करते हुए बताया कि बुधवार को एग्जिबिशन ग्राउंड में सुबह 9 बजे सकल जैन समाज द्वारा संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा। मूल कल्प सूत्र का वाचन होगा। वर्षभर में हुए दोषों की आलोचना शाम 4 बजे होगी। भाई बहनों का सामूहिक संवत्सरी प्रतिक्रमण होगा। सभी से इसमें भाग लेने का आग्रह किया गया है।
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