मन, वचन, काया में स्थिर होना ही सामायिक : कनकप्रभाजी

हैदराबाद, सामायिक का अर्थ होता है मन, वचन, काया में स्थिर हो जाना। हमें अपने मन को दृढ़ बनाकर धर्म क्रिया को करना चाहिए। उक्त उद्गार फीलखाना स्थित महावीर भवन में श्री महावीर स्वामी जैन श्वे. संघ चातुर्मास व्यवस्था समिति द्वारा आयोजित चातुर्मासिक धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी कनकप्रभाजी म.सा. ने उक्त उद्गार दिये।

प्रचार प्रसार मंत्री उत्तम संकलेचा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पू. कनकप्रभाजी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि ज्ञानी भगवंत कहते हैं कि जो भी कार्य हम करते हैं, यदि उसे समता भाव से करेंगे, तो ही परम सुख का आनंद प्राप्त होगा। हम संसार रूपी दौड़ में कितना भाग रहे हैं, अब उस दौड़ को रोकना चाहिए तभी हम स्वयं का उद्धार कर पायेंगे।

चक्र साधना व तप आराधना से सजी चातुर्मासिक धर्मसभा

म.सा. ने कहा कि हम जो तपस्या करते हैं उसमें द्रव्य काफी कम मात्रा में लगाना चाहिए। हमारी तपस्या समभाव की होना चाहिए। जब हम तपस्या करते हैं, उसमें हमें आराधक बनना चाहिए, विराधक नहीं।आज दत्त सूरी के बियासना कराने का लाभ ओकीदेवी मुलतानमल संकलेचा परिवार एवं चित्त प्रसन्न तप के एकासने कराने का लाभ जेठीदेवी मांगीलाल संकलेचा परिवार ने लिया।

चातुर्मास व्यवस्था समिति द्वारा लाभार्थी का सम्मान किया गया। रविवार 27 जुलाई को सुबह 9 से 11 बजे तक चक्र साधना के रूप में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें लोगस्य सूत्र और नवकार मंत्र की विशेष आराधना कराने शेखर वैद पधारेंगे। दोपहर में बालक-बालिकाओं का शिविर रहेगा।

कल चित्त प्रसन्न तप एकासना आकाश कुमार महावीर कुमार बागरेचा की ओर से रहेगा। चातुर्मास सह संयोजक प्रवीण कुमार ने सभी से धर्म क्रिया में जुड़ने का आग्रह किया। कार्यक्रम की व्यवस्था श्री जिनदत्त सूरी जैन सेवा मंडल द्वारा की जाएगी।

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