पुण्य उदय से सुधरेगा भव : भक्तिदर्शनजी म.सा.

हैदराबाद, जो कार्य करना है उसे अभी करो। जीवन का कोई भरोसा नहीं। कब अंतिम श्वांस आ जाए। जीवन के दूसरे कार्यों को रोक दीजिए और धर्म व दान के कार्यों को बढ़ा दीजिए, ताकि पुण्य का उदय हो। इससे यह भव और परभव सुधर जाएंगे। उक्त उद्गार गोशामहल स्थित शंखेश्वर भवन में श्री शंखेश्वर पारसनाथ जैन संघ गोशामहल के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में नूतन आचार्य भक्ति रत्नेश्वरजी म.सा. के शिष्य बाल मुनि जी श्री भक्ति दर्शनविजयजी म.सा. ने दिये। म.सा. ने कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र के चौथे अध्ययन में प्रभु महावीर हमें चेतावनी दे रहे हैं कि जो कार्य करना है उसे अभी करो।

पुण्य संचय का अवसर, धर्मकार्य में देर न करने का संदेश

देरी न करो। ना श्वांस का भरोसा है, ना वास का। हमारे बड़े बुजुर्गों की पुण्यवाणी है जो हम आराम से जीवन यापन कर रहे हैं। ना जाने कब घर छूट जाए। कब जवानी चली जाए। ना जाने कब सांस छोड़ कर चली जाए। इसलिए हमें जो करना है अभी करना है और धर्म दान कर पुण्य का संचय कर लेना उचित है।

प्रचार संयोजक जसराज देवड़ा धोका ने बताया कि रविवार को 24 तीर्थंकर भगवान के मां-बाप बनने का कार्यक्रम रखा गया है। विभिन्न श्रावकों ने चढ़ावा बोलकर अपना-अपना नाम तीर्थंकर के माता-पिता के रूप में लिखाया है। आज प्रवचन में प्रभावना का लाभ पुष्पा देवी नरेश कुमार बागरेचा ने लिया।

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आज लोगस तप के तपस्वियों का बियासना करने का लाभ बसंती देवी पोपटलाल टापरानी परिवार ने लिया। आज सुबह भगवान की स्नात्र व नव अंगी पूजा में बच्चों को इनाम लीला देवी दिल्ली चंद भंडारी परिवार ने दिए। बच्चों के शिविर में अल्पाहार का लाभ ओटी देवी तेजराज मदानी परिवार ने लिया। कार्यक्रम के पश्चात संघ की तरफ से अल्पाहार की व्यवस्था रखी गई। संघ अध्यक्ष चंपालाल भंडारी ने सकल संघ से प्रतिदिन प्रवचन में पधारने की विनती की है।

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