तप करने से क्षय होते हैं संचित कर्म : साध्वी सुमंगलप्रभाजी
हैदराबाद, तप मन व भाव से किया जाता है। देखा देखी तप नहीं होता है। जो जीव तप करता है, उसके पुराने से पुराने संचित कर्म क्षय होते हैं। उक्त उद्गार सिकंदराबाद स्थित मारुति विधि जैन स्थानक में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिकंदराबाद के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में साध्वीरत्ना डॉ. सुमंगलप्रभाजी म.सा ने दिये।
पूज्यश्री ने कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र में 27वें प्रश्न में तप करने से जीव को होने वाले लाभ पर बताया गया है कि व्यक्ति प्रतिस्पर्धा के लिए सामने वाले द्वारा खरीदी गई भौतिक वस्तु को देखकर उससे अच्छी वस्तु खरीदने का मन तो बना लेता है लेकिन जब कोई तपस्या करता है तो उससे अधिक तप करने की नहीं सोचता है। जीवन में किया गया तप संचित कर्मों को जलाता है। कर्मों को राख कर अष्टकर्म दल को मिटा देता है।
म.सा. ने कहा कि जिनका तन बल मजबूत होता है वही तपस्वी बनता है। चार प्रकार के बल हैं और उनके चार प्रकार के फल भी प्राप्त होते हैं। तन बल से व्यक्ति तपस्वी बनता है और तपस्या का फल पाता है। मन से तप करने पर मनस्वी, वचन बल से वर्चस्वी और आत्मबल से ओजस्वी बनता है। धर्मसभा का संचालन करते हुए संघ के महामंत्री सुरेन्द्र कटारिया ने बताया कि नवकार महामंत्र का जाप सुचारू रूप से चल रहा है।
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मासक्षमण तपस्या और सिद्धि तप का आयोजन
इस वर्ष का यह प्रथम मासक्षमण हुआ है। शुक्रवार 8 अगस्त को श्रमण सूर्य पूज्य प्रवर्तक श्री मरुधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा की 135वीं जन्म जयंती एवं शेरे राजस्थान प्रवर्तक श्री रूपमुनिजी म.सा की 99वीं जन्म जयंती सामायिक दिवस के रूप में मनायी जाएगी। सभी 3 से 5 सामयिक करने का लक्ष्य रखें। आज दीर्घ तपस्वी मधु महेन्द्र पोकरणा के मासक्षमण की तपस्या के अवसर पर कल्याणकारी स्तुति की गई।
तपस्वी के अनुमोदनार्थ गीत के माध्यम से प्रीति पोकरणा, संतोष गुगलिया, खुशी पोकरणा, हर्षा पोकरणा ने अपने भाव व्यक्त किए। संघपति संपतराज कोठारी ने तपस्या में परिवार के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। तपस्वी बहन का स्वागत एवं अभिनंदन चांदी के मोमेंटो, शॉल और माला से किया गया। तपस्या की बोली वीणा गडवानी ने 11 उपवास, पद्मा पोकरणा ने 8 उपवास और तपस्वी मधु पोकरणा के पति महेन्द्र पोकरणा ने एक महीने नवकारसी से ली।
आज मधु महेन्द्र पोकरणा की तपस्या के उपलक्ष्य में लाभार्थी परिवार शांतिलाल, सुनील, महेंद्र, यश पोकरणा की ओर से गौतम प्रसादी का आयोजन किया गया एवं प्रभावना दी गई। अध्यक्ष गौतमचंद गुगलिया ने तपस्वी की अनुमोदना के लिए धर्म सभा में पधारे सभी का आभार व्यक्त किया। संघ में आज सिद्धि तप के छठे चरण के प्रथम दिवस सिद्धि तप करने वालों के एकासना की व्यवस्था सिकंदराबाद स्थानक भवन में रखी गई, जिसमें लगभग 110 एकासना हुए।
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