एम्मार को सरकारी जमीन देकर अधिकारियों ने की कमाई, सीबीआई ने हाईकोर्ट में रखा पक्ष
हैदराबाद, सीबीआई ने तेलंगाना उच्च न्यायालय में दलील देते हुए कहा कि तत्कालीन उद्योग सचिव कंदुला विश्वेश्वर राव ने संयुक्त आंध्र-प्रदेश के दौरान एम्मार परियोजना के पक्ष में फैसले लिए और उस कंपनी को फायदा पहुँचाया। सीबीआई ने कहा कि महँगे प्लॉट को पाँच हजार रुपये प्रति वर्ग गज के सस्ती दर से खरीदा गया।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि इससे एम्मार को फायदा हुआ और एपीआईआईसी को नुकसान पहुँचा। तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जूकंटी अनिल कुमार ने तत्कालीन उद्योग सचिव कंदुला विश्वेश्वर राव, जो 12वें आरोपी हैं, की याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में एम्मार मामले को लेकर सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने का आग्रह किया गया।
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सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अधिवक्ता टी. सृजन कुमार रेड्डी ने दलील देते हुए बताया कि एम्मार प्रॉपर्टीस को जमीन आवंटन के कारण एपीआईआईसी को 43.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और आरोपियों को 167.29 करोड़ रुपये का अवैध लाभ हुआ। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 के दौरान वाईएसआर सरकार के सत्ता में आने के बाद एम्मार प्रॉपर्टीस पीजीएससी (दुबई) की परियोजना की समीक्षा करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि अगर एपीआईआईसी प्रति एकड़ जमीन की कीमत 29 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखती है, तो उद्योग विभाग के सचिव के तौर पर याचिकाकर्ता के इनकार पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और इसे साजिश के नजरिए से देखा जाना चाहिए। दलील सुनने के पश्चात मामले की सुनवाई 17 नवंबर तक स्थगित कर दी गई।
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