वाहनों के रंग को लेकर हैद्रा को अदालत की फटकार
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्य भर में हंगामा कर रही हैद्रा को जमकर फटकार लगाई। विशेषकर हैद्रा के वाहनों के रंग को लेकर सवाल उठाया और कहा कि इस प्रकार असहज रंग वाहनों पर क्यों लगाया गया, क्या वे युद्ध के लिए जा रहे हैं। अदालत ने कहा कि हैद्रा जन सामान्य की असुविधाओं पर ध्यान न देते हुए अपनी कार्रवाई कैसे कर रही है। अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारी अदालत के आदेश पर अमल करने में उदासीन रवैया अपना रहे हैं।
अदालत की अवमानना की याचिका दायर करने पर अदालत में हाजिर होने के आदेश देने के बावजूद भी इन आदेशों को अपने प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। अदालत में हाजिर होने का आदेश देने पर आम जनता का पैसा खर्च होने के अलावा और कोई प्रयोजन नहीं रहता। अदालत ने कहा कि सही समय का इंतजार किया जा रहा है। सही समय आने पर अदालत का अधिकार क्या होता है, इसे दिखाने की चेतावनी दी।
तम्मिडीगुंटा भूमि विवाद पर हाईकोर्ट में सुनवाई
रंगारेड्डी ज़िला, शेरीलिंगमपल्ली मंडल के ख्वाजागुड़ा स्थित तम्मिडीगुंटा एफटीएल परिसर में निजी व्यक्तियों से संबंधित भूमि पर तम्मिडीगुंटा चेरुवु के पुनरुत्थान के कार्यों के तहत पट्टा भूमि में हस्तक्षेप किए जाने के कारण एस. वेंकटेश्वर राव ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस याचिका पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के पश्चात अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने के अंतरिम आदेश जारी किए थे।
इस दौरान अंतरिम आदेश का उल्लंघन करते हुए हैद्रा द्वारा की गई कार्रवाई को चुनौती देते हुए एस. वेंकटेश्वर राव ने अदालत की अवमानना की याचिका दायर की। इन दोनों याचिकाओं पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस बी. विजय सेन रेड्डी ने आज सुनवाई की। न्यायाधीश के यह कहने पर कि सरकार के विशेष अधिवक्ता राहुल रेड्डी के आग्रह पर इस याचिका पर आज सुनवाई की जा रही है, इस पर याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता तरुण जी. रेड्डी ने आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें सुनवाई के लिए कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई।
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हाईकोर्ट ने HMDA को शांतिपूर्वक कार्य करने की नसीहत
उन्होंने सुनवाई स्थगित करने का आग्रह किया और कहा कि दोनों पक्षों की दलील सुनने के पश्चात अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए, जिसका हैद्रा ने उल्लंघन किया। सरकारी अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की 6 एकड़ भूमि पर किसी प्रकार का कोई कार्य नहीं किया गया। शेष क्षेत्र में कार्य करने के लिए अनुमति देने का आग्रह किया।इस दौरान न्यायाधीश ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अदालत तालाब के पुनरुत्थान के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर रही है, कोई निजी व्यक्ति अदालत की शरण लेता है, तो वर्षाकाल के दौरान बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अंतरिम आदेश जारी न करने पर आपत्ति जताई जा सकती है।
न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि हंगामा किए बिना शांतिपूर्वक हैद्रा अपना कार्य क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदारी से कार्य करने की हिदायत दी थी। एफटीएल के निर्धारण के लिए एक नीति के तहत कार्य किए बिना वर्षों से इसे विवादास्पद बनाकर रखा गया है। यदि एफटीएल की परिधि में निजी भूमि आती है, तो भू-अधिग्रहण अधिनियम के तहत इस भूमि का अधिग्रहण करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। इस प्रकार से अधिग्रहण कर विवाद को विराम दिया जा सकता है। इस दलील के साथ इस मामले की सुनवाई सोमवार तक स्थगित कर दी गई।
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