तेलंगाना में महिलाओं के विरुद्ध अपराध!

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की हाल ही में आई रिपोर्ट की मानें (न मानने की कोई वजह भी नहीं), तो महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के मामले में तेलंगाना दक्षिण भारत का अग्रणी राज्य बन गया है। 2023 में राज्य में महिलाओं के ख़िल़ाफ कुल 23,678 अपराध दर्ज किए गए, जो 2022 के 22,066 मामलों की तुलना में 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। प्रति लाख महिला आबादी पर अपराध दर 124.9 पहुँच गई, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है और राजस्थान के बाद देश में दूसरा स्थान प्राप्त करती है।

इससे समाज की जड़ों में गहराई तक फैली लैंगिक असमानता और हिंसा की संस्कृति का पता चलता है। एक ऐसे राज्य में, जहाँ शहरीकरण और आर्थिक प्रगति तेजी से हो रही है, महिलाओं की सुरक्षा पर यह काला साया समाज के समग्र विकास को बाधित करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ इन अपराधों का बहुलांश पारिवारिक और सामाजिक हिंसा से जुड़ा है।

तेलंगाना में बढ़ते अपराध और उनके कारण

पति या ससुराल वालों द्वारा क्रूरता के 10,518 मामले दर्ज हुए, जो कुल मामलों का 55.5 प्रतिशत हैं। इसके बाद, महिलाओं की गरिमा का हनन करने के इरादे से हमले के 5,024 मामले, अपहरण और बंधक बनाने के 2,152 मामले तथा बलात्कार के 817 मामले शामिल हैं। दहेज हत्या के 145, पीछा करने के 1,884 तथा ताक-झाँक के 165 मामले भी चिंताजनक हैं। विशेष रूप से, साइबर अपराधों में उछाल देखा गया – सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत 120 मामले, जिनमें 78 यौन सामग्री के प्रसार से संबंधित थे।

हैदराबाद का साइबर दुर्व्यवहार के मामलों में दूसरे स्थान पर आना इस डिजिटल युग की नई चुनौतियों को उजागर करता है। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि अपराध न केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित हैं, बल्कि मानसिक, आर्थिक और डिजिटल स्तर पर भी फैले हुए हैं, जो महिलाओं को हर मोर्चे पर असुरक्षित बनाते हैं। इस बढ़ोतरी के कई कारण हैं। सबसे पहले, पितृसत्तात्मक मानसिकता और लैंगिक असमानता।

इनसे दहेज, घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न को बढ़ावा मिलता हैं। आर्थिक कारक जैसे बेरोजगारी और शहरीकरण से उत्पन्न तनाव भी हिंसा को भड़काते हैं। कहा जा सकता है कि, रिपोर्टिंग में वृद्धि जागरूकता और पुलिस पहुँच के सुधार से जुड़ी है। लेकिन वास्तविक घटनाओं में भी इज़ाफा हो रहा है। शराब और नशीले पदार्थों का सेवन, शिक्षा की कमी तथा साइबर प्लेटफॉर्म्स पर अनियंत्रित पहुँच ने नए आयाम जोड़े हैं। सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल्स और ब्लैकमेलिंग के मामले बढ़े हैं, जो युवा महिलाओं को निशाना बनाते हैं।

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महिला सुरक्षा के लिए तात्कालिक कदम और समाधान

व्यक्तिगत स्तर पर, ये अपराध महिलाओं में शारीरिक चोटों, मानसिक आघात, अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति को जन्म देते हैं। सामाजिक स्तर पर देखें तो, महिलाएँ सार्वजनिक स्थानों पर डर महसूस करने लगी हैं। तेलंगाना जैसे औद्योगिक राज्य (जहाँ महिला श्रम शक्ति अहम है) में इसका सीधा असर उत्पादकता पर पड़ता है। कुल मिलाकर, यह न केवल महिलाओं का, बल्कि पूरे समाज का अपमान है, जो विकास के दावों को खोखला सिद्ध करता है।

इन चुनौतियों के समाधान बहुस्तरीय और तात्कालिक होने चाहिए। पहली बात; कानूनों को मजबूत करना अनिवार्य है। तेलंगाना पुलिस की शी-टीमों का विस्तार किया जाना चाहिए। वन स्टॉप सेंटर्स (ओएससी) को अधिक संख्या में स्थापित कर मेडिकल, कानूनी और काउंसलिंग सेवाएँ एकीकृत की जाएँ। साइबर अपराधों से बचने के लिए डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना होगा। इसके अलावा, सामुदायिक स्तर पर, लैंगिक समानता और सहमति की शिक्षा पर ज़ोर देना होगा। ज़रूरी है कि, फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स की स्थापना और दोषियों के लिए कठोर सजा सुनिश्चित हो। साथ ही, पुरुषों के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण अनिवार्य हो।

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