चुनावी अखाड़े के घोषणा पहलवान !
मल्लू बरेठ एकदम घबराया-हांफता पार्टी ऑफिस में घुसा। उसकी सांस बेतरह फूल रही थी! हम सब भी किसी अनहोनी की आशंका से उसको घबराए मुंह फाड़े देखने लगे ! हमारे चेहरे प्रश्नों से भरे हुए थे! वह हाथ के इशारे से हम लोगों को रोकते हुए, कुछ पल छाती पर हाथ रखे जोर-जोर से सांस लेता रहा फिर धौकनी जैसी सांस को थामते हुए बलि के बकरे जैसा मिमियाया -भैया जी, मैं तुरंत अभी समता-पार्टी के प्रेस कांफ्रेंस से आ रहा हूँ। उन्होंने दीदी-अभिनन्दन योजना बनाई है और उसके माध्यम से चुनाव जीतने पर हर महिला को हर माह दस हजार रूपये देने की घोषणा कर रहे हैं !
भैया जी अपनी कुर्सी में थोड़ा कसमसाए और पहलू बदलते हुए अपने को सेट किया! वे पिछले कई हफ्तों से कूल्हे के पीछे उग आये सोआस फोड़े से परेशान थे! विधानसभा चुनाव इतना नजदीक नहीं होता तो वे डॉक्टर के पास या घर में बिस्तर पर आराम कर रहे होते! कुर्सी के लिए सोआस फोड़े का दर्द क्या, वे कुंभीपाक नर्क भी भुगत सकते थे! वे मल्लू की तरफ वेदना पूरित नजरों से कुछ क्षण देखते रहे, फिर कूल्हे के दर्द को अंदर ही अंदर जज्ब करके, धीर-प्रशांत नायक की तरह मुस्कुराते हुए बोल – मल्लू घबरा क्यों जाता है रे…! तू गुप्त समाचार भर ला, गुप्त याने समझा न…अंदर की खबर…जो अखबारों के पकड़ के भी बाहर हों…तेरी ये सड़ियल खबर तो कल के अख़बारों और टी .वी पर वैसे ही आ जायेगी…!
चुनावी वादों पर भैया जी का व्यंग्य और ठहाके
वे कुछ पल रुके और हंसते हुए बोले – इसमें घबराने की क्या बात है..? समता पार्टी दस हजार देने की घोषणा कर रही है तो हम अपनी प्यारी बहना योजना में पन्द्रह हजार की घोषणा करेंगे…! वो बीस करेंगे तो हम पच्चीस करेंगे ! चुनावी घोषणायें ढपोरशंखी होती हैं रे बुद्धू राम, चुनाव के बाद ये कभी पूरी थोड़ी की जाती हैं, चुनाव खतम, पैसा हजम…! भैया जी की बात सुन हम सब मुस्कुरा रहे थे परन्तु मल्लू भौकवाय खड़ा था।
उसे बिलकुल अनुमान नहीं था कि जिसे वह अत्यंत महत्वपूर्ण समझ रहा था, वह तो कचरे के डब्बे में डालने के काबिल भी नहीं! तभी भैया जी का एक और खबरिया भुलवा डरा-घबराया पूंछ कटे श्वान की तरह अंदर घुसा। भैया जी उसको देखकर चेहरे पर अपनी हंसी दबाते हुए पूछे – हाँ रे भुलवा…अब तू भौंक, तेरा क्या समाचार है…? भुलवा पहले नई-नवेली दुल्हन की तरह शर्माया, फिर हम सब की तरफ नजर दौड़ाते हुए खिसियाने स्वर में बोला – भाई साहेब जी….जनता जागरण पार्टी वाले हर घर से एक आदमी को नौकरी देने की घोषणा करने वाले हैं…!
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भैया जी का गुस्सा चरम पर, अंदर की खबर की तलाश
इतना सुनते ही भैया जी की त्योरियां अचानक चढ़ गईं। वे भड़कते हुए बोले -सालों तुमको विरोधी पार्टी वालों के दफ्तर में हम गुप्त रूप से इसलिए फिट नहीं किया हूँ कि तुम लोग ऐसे सड़ियल समाचार लाओ…! वो लोग हर घर से एक आदमी को सरकारी नौकरी देंगें तो हम साले पूरी फैमिली को ही सरकारी नौकरी देने की घोषणा करेंगे…! इसमें क्या बड़ी बात है…? अबे, कुछ अंदर की खबर लाओ…अंदर की जिससे इस चुनाव के समय उनकी पार्टी को हम बदनाम कर सकें…!

स्कैंडल..स्कैंडल…! जैसे अमुक पार्टी के नेता की बेटी फलाने के साथ भाग गई…! अमुक नेता का बेटा होटल में रंगरेलियां करता पकड़ा गया…! अमुक नेता शराब की बोतल और रुपया बांट रहा था…! कुछ समझ में आया…? कहाँ साले ये भोंदूओं के पीछे हम बेकार में पैसा खर्च कर रहे हैं…! वे पाँव पटकते हुए गुस्से से चीखे -भागो सालों यहाँ से… कुछ काम की खबर हो तो यहाँ आना वरना यूं दिमाग खराब करने मत चले आना! दिमाग खराब कर दिया..! भैया जी का मुंह गुस्से और निराशा से ललमुहां बन्दर की तरह ललिया आया था ! और हम सब मजे से उन्हें यूं गुस्सा होते देख रहे थे।
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