दिल्ली विस्फोट : विष-स्फोट !

दस नवंबर, 2025 – खून और आँसुओं में डूब गई एक शाम! लाल किले के मेट्रो स्टेशन के निकट एक कार में विस्फोट। एक अप्रिय घटना जो न केवल मासूम ज़िंदगियों को निगल गई, बल्कि पूरे राष्ट्र के दिल को चीर गई। बारह निर्दोषों की जानें चली गईं। दर्जनों घायल हुए। वायुमंडल मानव-शरीरों की धज्जियों और दर्द की चीखों से भर उठा। हो-न-हो यह विस्फोट आतंक की उस काली साजिश का हिस्सा लगता है जो हमारी एकजुटता को तोड़ना चाहती है।

अभी रहस्य की धुंध पूरी छँटी नहीं है। फिर भी यह तो लगभग साफ ही है कि एक ह्युंडाई आई-20 कार, जो संभवत अर्ध-निर्मित आईईडी से लदी थी, अचानक फट पड़ी। इतना जबरदस्त विस्फोट कि कार के परखच्चे सौ मीटर दायरे में बिखर गए। दुकानों-घरों तक को नुकसान पहुँचा। एनआईए और दिल्ली पुलिस के एंटी-टेरर लॉ के तहत केस दर्ज करने से भी इसकी गंभीरता को समझा जा सकता है।

छह डॉक्टर और कई संदिग्ध गिरफ्तार, जांच जारी

यह विस्फोट फरीदाबाद के एक टेरर मॉड्यूल से जुड़ा प्रतीत होता है, जहाँ हाल ही में कई गिरफ्तारियाँ हुईं। जाँच के दौरान उठा एक सवाल यह भी है कि क्या विस्फोट का मूल लक्ष्य उत्तर प्रदेश था और चालक की हड़बड़ी से यह दिल्ली में ही फट गया? या शायद मॉड्यूल के निशाने पर कई राज्य थे। यह हड़बड़ी आतंकियों की घबराहट को दर्शाती है, जो हालिया कार्रवाइयों से डरे हुए हैं। एनआईए ने छह डॉक्टरों समेत कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।

डॉ.शाहीन फातिमा, (जो जैश-ए-मोहम्मद की महिला भर्ती का नेटवर्क चला रही थी) और डॉ.परवेज अंसारी लखनऊ से पकड़े गए हैं। सयाने बता रहे हैं कि यह आईएसआईएस-के का हमला हो सकता है, जो फरीदाबाद क्रैकडाउन के बाद घबराहट में ट्रिगर हुआ। इसके तार पाकिस्तानी जेईएम-लश्कर से भी जुड़े लगते हैं। गिरफ्तारियाँ दर्शाती हैं कि हमारा खुफिया तंत्र सक्रिय है, लेकिन विस्फोट कहीं न कहीं सुरक्षा में दरारों की ओर भी इशारा करता है।

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भारत की एकता और अखंडता पर हमले का प्रतिकार जरूरी

कहना न होगा कि भविष्य की संभावनाएँ चिंताजनक हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह हमला पुलवामा या पठानकोट जैसा लगता है – पाकिस्तान प्रायोजित, लेकिन आईएसआईएस के नए नेटवर्क से! विशेष रूप से यह प्रश्न भी विचारणीय है कि, क्या यह ऑपरेशन सिंदूर का बदला है? मई 2025 में ऑपेरशन सिंदूर के तहत भारत द्वारा पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर किए गए सटीक हमलों ने जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को बुरी तरह चोट पहुँचाई थी और अब उनकी बदला लेने की धमकियाँ साकार हो रही हैं।

हो सकता है, यह विस्फोट उसी का प्रत्यक्ष परिणाम हो। अगर ऐसा है, तो इससे ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की माँग उठना भी स्वाभाविक है! भारत बार-बार कह चुका है कि हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन राष्ट्र की एकता और अखंडता पर हुए किसी भी वार के घोर प्रतिकार के लिए पूर्णत सन्नद्ध हैं। देखना होगा कि इस आतंकी साज़िश के सीमापार स्रोतों पर भारत कब और क्या कार्रवाई करता है।

आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर ज़रूरी है कि हम सीसीटीवी नेटवर्क को और मज़बूत करें, एआई आधारित सर्विलांस अपनाएँ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाएँ। लेकिन सबसे बड़ा खतरा आंतरिक ध्रुवीकरण का है। देश में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने की आतंकी संगठनों और उनके आकाओं की मंशा को विफल करने के लिए हमें एकजुट रहना होगा। अंतत, दिल्ली विस्फोट के हताहतों और पीड़ितों का दर्द हम सबका साझा दर्द है। सरकार, विपक्ष, नागरिक सबको मिलकर इस विष-स्फोट का प्रतिकार करना होगा – अपनी अछेद्य-अभेद्य एकजुटता से! क्योंकि समर शेष है!

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