हैदराबाद, त्योहारों के मौसम में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन कंपनियाँ बिक्री बढ़ाने की तैयारी में हैं। जीएसटी काउंसिल द्वारा ईवी पर 5 प्रतिशत स्लैब बरकरार रखने से उद्योग जगत का मानना है कि इस बार मांग पहले से अधिक मजबूत होगी।
ओला इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी, टीवीएस, बजाज ऑटो, ज़ेलो इलेक्ट्रिक, बाउंस और जुगे इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियाँ नए मॉडल, ज़ीरो डाउन पेमेंट स्कीम और विस्तारित वारंटी जैसे ऑफ़र्स के साथ विशेषकर गैर-मेट्रो शहरों में नेटवर्क बढ़ा रही हैं।
अक्टूबर–नवंबर में आमतौर पर बिक्री 20–30 प्रतिशत बढ़ती है। पिछले साल इसी अवधि में इलेक्ट्रिक दोपहिया पंजीकरण में 54 प्रतिशत की तेज़ उछाल आई थी। इस बार भी कंपनियों को ऐसी ही उछाल की उम्मीद है।
कंपनियों की रणनीति
त्योहारों से पहले इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियाँ तेज़ी से नए कदम उठा रही हैं। ओला इलेक्ट्रिक ने अपने S1 स्कूटर लाइनअप का विस्तार करते हुए नए ऑफ़र्स की घोषणा की है, जबकि एथर एनर्जी ने पारिवारिक उपयोग को ध्यान में रखते हुए नया स्कूटर ‘एथर रिज़्ता’ लॉन्च किया है और इसके लिए वित्तीय साझेदारियाँ भी की हैं।
ज़ेलो इलेक्ट्रिक के सह-संस्थापक आदित्य बहेती का कहना है कि उनके Knight+ मॉडल की लॉन्चिंग के बाद मांग में 20–25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, जुगे इलेक्ट्रिक के संस्थापक नीरज मांचंदा ने बताया कि कंपनी नेटवर्क विस्तार, एक्सचेंज प्रोग्राम और रेफ़रल बेनिफ़िट्स जैसी योजनाओं पर काम कर रही है। दूसरी ओर, बाउंस ईवी इस बार बी2बी मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही है।
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फाइनेंसिंग और जीएसटी का असर
नई वित्तीय योजनाएँ जैसे ज़ीरो डाउन पेमेंट, लंबी किश्त अवधि और डायनामिक लीजिंग मॉडल छोटे शहरों में ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। अल्ट मोबिलिटी के सीईओ देव अरोड़ा ने कहा कि यह बदलाव केवल मौसमी नहीं, बल्कि संरचनात्मक है और लंबे समय तक ईवी अपनाने में मदद करेगा।
आइसई वाहनों की चुनौती: हालाँकि पेट्रोल स्कूटर पर जीएसटी 28 से घटाकर 18 प्रतिशत करने से कीमतों का अंतर कम हुआ है, लेकिन उद्योग जगत का मानना है कि इससे ईवी निर्माताओं की इनपुट लागत भी कम हुई है और समय के साथ ईवी और पेट्रोल वाहनों की कुल लागत बराबरी पर आ सकती है।
