मीर आलम प्रोजेक्ट पर विवाद : 55 एकड़ में भूमि अधिग्रहण का विरोध

हैदराबाद, बिल्डिंग एंड लैंड ओनर्स असोसिएशन, शिवरामपल्ली द्वारा मीर आलम टैंक केबल ब्रिज प्रोजेक्ट के तहत आसपास की लगभग 55 एकड़ निजी भूमि में एंटरटेनमेंट पार्क, ईको पार्क की प्रस्तावित योजना का विरोध करते हुए सरकार से प्रस्ताव का विचार त्यागने की अपील की गई।

अत्तापुर स्थित मीना अस्पताल परिसर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शैलेश जैन ने बताया कि असोसिएशन केबल ब्रिज के खिलाफ नहीं है, केबल ब्रिज के निर्माण में किसी की भी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा रहा है, लेकिन केबल ब्रिज के पास एंटरटेनमेंट, इको पार्क के नाम पर लगभग 55 एकड़ भूमि में बने घरों, अस्पतालों, धार्मिक स्थलों, अस्पतालों को तोड़ने का प्रस्ताव गलत है।

शैलेश जैन ने 55 एकड़ भूमि के अधिग्रहण करने के प्रस्ताव का पूरजोर विरोध करते हुए कहा कि ब्रिज बनाओ, लेकिन किसी को घरों को उजाड़ कर बेघर मत करो। उन्होंने पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से कहा कि डॉ. मनमोहन फ्लाईओवर के निर्माण के बाद से ही क्षेत्र में ट्रैफिक की समस्या लगभग समाप्त हो चुकी है, ऐसे में इस ब्रिज की क्या आवश्यकता है।

1000 करोड़ खर्च पर असोसिएशन का विरोध

शैलेश जैन ने बताया कि सरकार द्वारा प्रोजेक्ट के तहत लगभग 430 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है, जबकि अब 55 एकड़ निजी भूमि का अधिग्रहण करने में अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने सवाल किया कि क्या जनता के कर के लगभग 1 हजार करोड़ रुपये इस तरह खर्च करना सही है।

शैलेश जैन ने कहा कि उनके अलावा सभी लोग अपने घरों, प्रतिष्ठानों से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं, ऐसे में सरकार अपना निर्णय वापस ले। असोसिएशन से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि सरकारी अधिकारी भूमि अधिग्रहण करने के बाद तीन गुणा मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं, यहां 11 हजार रुपये प्रति गज सरकारी भूमि का मूल्य है, जबकि मार्केट वैल्यू 85 हजार रुपये से 1 लाख रुपये वर्ग गज के बीच है, ऐसे में जनता के साथ धोखा कोई बर्दाश्त नहीं करेगा।

शैलेश जैन ने कहा कि इस प्रस्ताव के खिलाफ केंद्रीय व प्रदेश मंत्रियों को भी ईमेल, पोस्ट के जरिये अवगत करवा दिया गया है, प्रदेश सरकार की इस योजना की वजह से लगभग 1500 से 2000 हजार परिवार सड़क पर आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि हाल ही में डॉ. मनमोहन सिंह फ्लाईओवर के निर्माण के लिए लगभग 790 करोड़ रुपये खर्च किये गये, क्या अब नये प्रोजेक्ट के लिए लगभग 1 हजार करोड़ रुपये खर्च करना सही है। अवसर पर प्रोजेक्ट के दायरे में आने वाले लोगों के अलावा अन्य लोगों ने भी सरकार से अपना निर्णय वापस लेकर लोगों को बेघर होने से बचाने की अपील की।

यह भी पढ़े : मीरआलम टैंक को पर्यटन स्थल में परिवर्तित करने कवायद शुरू

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