स्टेम सेल दान दे सकता है रक्त कैंसर पीड़ितों को जीवन का दूसरा मौका
हैदराबाद, गैर लाभकारी संस्था डीकेएमएस फाउंडेशन इंडिया द्वारा रक्त स्टेम सेल दाताओं की बड़े पैमाने पर आवश्यकता को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए फायरसाइड चैट का आयोजन किया गया। अवसर पर डॉ. एस.के. गुप्ता तथा पैट्रिक पॉल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि स्टेमसेल दाता रक्त कैंसर से जूझ रहे मरीजों को दूसरा जीवन प्रदान कर सकते हैं। इसलिए 18 से 55 वर्ष के स्वस्थ लोगों को स्टेम सेल दान हेतु पंजीकरण कराते हुए पीड़ितों को नया जीवन देने के लिए आगे आना चाहिए।
होटल मरक्यूर, हैदराबाद केसीपी में आयोजित कार्यक्रम में कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल्स, गच्चीबावली के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.के. गुप्ता ने भारत में रक्त कैंसर के मामले : चुनौतियाँ और आगे की राह विषय पर विचार रखते हुए कहा कि रक्त कैंसर के खिलाफ लड़ाई में पहला कदम जागरूकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बाद भारत रक्त कैंसर के मामलों में दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जहाँ हर साल लगभग 1,00,000 लोगों में इसकी पहचान होती है।
इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या के लिए स्टेम सेल प्रत्यारोपण एक प्रमाणिक और जीवन रक्षक उपचार है। बावजूद इसके कई मरीज और परिवार मिथकों या भ्रांतियों के कारण इससे हिचकिचाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिवर्ष 70,000 से अधिक लोग रक्त कैंसर से अपनी जान गंवा देते हैं लेकिन पंजीकृत स्टेम सेल दाता जीवन और मृत्यु के बीच अंतर ला सकते हैं।
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डीकेएमएस इंडिया ने बढ़ाई स्टेम सेल दान जागरूकता
रक्त कैंसर तथा थैलेसीमिया सहित अन्य रक्त विकारों से लड़ने के लिए समर्पित डीकेएमएस इंडिया के कार्यकारी अध्यक्ष पैट्रिक पॉल ने अवसर पर जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार संस्था ने देश में रक्त स्टेम सेल दाताओं की कमी को दूर करने में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में पंजीकृत रक्त स्टेम सेल दाताओं की संख्या अपर्याप्त है। वर्तमान में अर्ह आयु वर्ग की भारतीय आबादी का केवल 0.09 प्रतिशत ही रक्त स्टेम सेल दाता के रूप में पंजीकृत है।
भारत में हर पांच मिनट में किसी न किसी को रक्त कैंसर का पता चलता है। हर साल 10,000 से अधिक बच्चे थैलेसीमिया के साथ पैदा होते हैं। इसलिए रक्त स्टेम सेल दानदाताओं के पंजीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता है। पैट्रिक पॉल ने जानकारी देते हुए बताया कि तेलंगाना से 6,500 लोगों ने संभावित स्टेम सेल दानदाताओं के रूप में पंजीकरण कराया है। इनमें से 3,500 हैदराबाद से हैं। उन्होंने कहा कि पंजीकृत प्रत्येक स्टेमसेल दानदाता एक संभावित जीवनरक्षक है।
हम इस संभावना को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि हर जरूरतमंद मरीज को उपयुक्त दानदाता मिल सके। फायरसाइड चैट के बाद डीकेएमएस फाउंडेशन इंडिया ने दो बार अपने स्टेम सेल दान करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर सतीश रेड्डी सहित तीन अन्य रक्त स्टेम सेल दानदाताओं को सम्मानित किया। अवसर पर फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि स्टेम सेल दान करना कई लोगों के लिए उदारता का कार्य है, लेकिन सतीश रेड्डी का दो बार दान करने का निर्णय असाधारण भाव है। उन्होंने इसे निस्वार्थ भाव से अपना कर्तव्य समझकर दो अजनबियों को नया जीवन दिया।
