डॉक्टरों ने गर्दन से 5 किलो का ट्यूमर निकालकर बचाई जान

हैदराबाद, मेडिकवर हॉस्पिटल्स, हैदराबाद ने दुर्लभ और बार-बार होने वाले दाहिनी गर्दन के लिम्फैंगियोमा का सफलतापूर्वक इलाज किया। इससे एक मरीज 25 वर्षों से अधिक समय से पीड़ित था। रोगी को 2010, 2015 और 2025 में सर्जरी से गुजरने के बावजूद सूजन हो गयी, जिससे धीरे-धीरे गर्दन की गति सीमित हो गई और साँस लेने में कठिनाई होने लगी।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस जटील सर्जरी का नेतृत्व वरिष्ठ वैस्कुलर सर्जन डॉ. राहुल लक्ष्मीनारायण, कंसल्टेंट जनरल सर्जन डॉ. वेंकट पवन और एनेस्थिसियोलॉजी विभाग के डॉ. वेणुगोपाल ने किया। ट्यूमर का वजन लगभग 5 किलोग्राम था। यह पिछले ऑपरेशनों से महत्वपूर्ण गर्दन संरचनाओं और निशान ऊतक के साथ जटिल रूप से जुड़ा हुआ था।

डॉ. राहुल लक्ष्मीनारायणन ने बताया कि आवर्तक लिम्फैंगियोमास तकनीकी रूप से सबसे अधिक माँग वाले सर्जिकल मामलों में से एक है। घने निशान ऊतक की उपस्थिति और महत्वपूर्ण तंत्रिकाओं और वाहिकाओं की निकटता से रक्तस्त्राव और चोट का खतरा काफी बढ़ जाता है।

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उन्नत इमेजिंग, सावधानीपूर्वक योजना और सटीक सर्जरी के माध्यम से हम पूरे घाव को सुरक्षित रूप से हटाने और बिना किसी जटिलता के उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त करने में सक्षम थे। कंसल्टेंट जनरल सर्जन डॉ. वेंकट पवन ने कहा कि पिछले ऑपरेशनों में बड़े पैमाने पर घाव हो गए थे, जिससे सामान्य ऊतक परतों की पहचान करना मुश्किल हो गया था।

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महत्वपूर्ण संरचनाओं की सुरक्षा के लिए हर कदम पर सावधानीपूर्वक विच्छेदन की आवश्यकता होती है। यह उपलब्धि हमारी टीम के असाधारण समन्वय और अनुभव से ही संभव हो सकी। मरीज़ क़ाफी तेज़ी से ठीक हो गया। उसे ऑपरेशन के तीसरे दिन छुट्टी दे दी गई। बिना किसी कमज़ोरी या जटिलता के उसकी गर्दन की गति सामान्य हो गई।

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