आचार्य डिग्री कॉलेज में मनाया गया डॉ. बीआर अंबेडकर मानद डॉक्टरेट दिवस समारोह

हैदराबाद, उस्मानिया विश्वविद्यालय के डॉ. बी.आर. अंबेडकर शोध केंद्र द्वारा आज आचार्य डिग्री कॉलेज, जहीराबाद के सहयोग से डॉ. बी.आर. अंबेडकर मानद डॉक्टरेट दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आचार्य डिग्री कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उस्मानिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुमार मोलुगरम ने कहा कि शिक्षा न केवल किसी व्यक्ति के जीवन में, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास में बदलाव लाने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।

प्रो. कुमार मोलुगरम ने अपने संबोधन में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें महान संवैधानिक निर्माता, प्रख्यात न्यायविद, अर्थशास्री, सामाजिक न्याय के योद्धा तथा समाज सुधारक के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे, जिनके विचार आज भी देश का मार्गदर्शन करते हैं। प्रो. मोलुगरम ने कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने उस्मानिया विश्वविद्यालय के विकास के लिए एक हजार करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की है, जो उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान को संवर्धन देने हेतु राज्य सरकर की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

ग्रामीण कॉलेज छात्रों की प्रतिभा पहचान और प्रोत्साहन पर जोर

अवसर पर उन्होंने ग्रामीण डिग्री कॉलेजों के छात्रों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए डॉ. बी.आर. अंबेडकर रिसर्च सेंटर के प्रयासों की सराहना की। साथ ही छात्रों से अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने तथा समाज के लिए उपयोगी योगदान देने वाले बनने की अपील की।

प्रो. कुमार मोलुगरम ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन है। सच्ची समफद्धि भौतिक संपदा में नहीं, बल्कि बौद्धिक पूंजी में निहित है। शिक्षा समानता, आलोचनात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देकर व्यक्तियों को सशक्त बनाती है, समुदायों का उत्थान करती है और राष्ट्र निर्माण करती है।आधुनिक युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाज के हर क्षेत्र को नया आकार देने वाली परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरी है।

हालांकि एआई आधारित तकनीकी प्रगति तभी सार्थक, समावेशी और टिकाऊ हो सकती है जब वह सशक्त, सुलभ और मूल्य आधारित शिक्षा पर आधारित हो। प्रौद्योगिकी को मानवता की सेवा करनी चाहिए। शिक्षा वह महत्वपूर्ण कड़ी है जो समावेशी विकास के लिए एआई के नैतिक, कुशल और सामाजिक रूप से जागरूक अनुप्रयोग को सुनिश्चित करती है।

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नागराजू ने डॉ. अंबेडकर की शिक्षा और संघर्ष पर प्रकाश डाला

हैदराबाद विश्वविद्यालय के समाजशास्र विभाग प्रमुख प्रो. जी. नागराजू ने मुख्य वक्तव्य देते हुए डॉ. बी.आर. अंबेडकर की असाधारण शैक्षिक यात्रा पर प्रकाश डाला। समाज और शिक्षा प्रणाली में लगातार अपमान और बहिष्कार का सामना करने के बावजूद डॉ. अंबेडकर ज्ञान प्राप्ति के प्रति दृढ़ संकल्पित रहे। उनकी बौद्धिक उत्वकृष्टता ने उन्हें 1920 के दशक में दुनिया के कुछ सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में अध्ययन करने में सक्षम बनाया। भारत लौटने पर डॉ. अंबेडकर सामाजिक और धार्मिक भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष में सशक्त नेता के रूप में उभरे। भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता के रूप में उन्होंने सामाजिक न्याय के आदर्शों को संस्थागत रूप दिया, विशेष रूप से समानता के अधिकार के माध्यम से जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में गरिमा और समान अवसरों को सुनिश्चित किया।

अवसर पर प्रो. कुमार मोलुगरम ने उस्मानिया यूनिवर्सिटी पीजी कॉलेज, मिर्जापुर का दौरा किया। इस दौरान स्थानीय प्रशासनिक तथा अकादमिक स्टाफ के साथ बुनियादी ढांचे, विकास रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। कुलपति ने अवसर पर कहा कि कॉलेज में मौजूदा सुविधाओं का आकलन करने, जीर्णोद्धार और उन्नयन के लिए व्यापक कार्य योजना तैयार करने के लिए जल्द ही समिति का गठन किया जाएगा। कार्यक्रम में ओयू कुलपति के ओएसडी प्रो. एस. जितेंद्र कुमार नाइक, डॉ. बी.आर. अंबेडकर शोध केंद्र के निदेशक एम. लिंगप्पा, सिविल सेवा अकादमी निदेशक डॉ. कोंडा नागेश्वर, बीसी सेल की निदेशक डॉ. माधवी, अल्पसंख्यक सेल की निदेशक प्रो. हमीदा व अन्य उपस्थित थे।

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