राजनीतिक द्वेष के चलते मुख्यमंत्री कर रहे हैं नगर की उपेक्षा : विवेकानंद
हैदराबाद, भारत राष्ट्र समिति (भारास) सचेतक के.पी. विवेकानंद गौड़ ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी सरकार से हैदराबाद के प्रति बदले की भावना से पेश आने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव में हैदराबाद की जनता ने एक भी सीट पर नहीं जितायी, इसलिए मुख्यमंत्री हैदराबाद की उपेक्षा कर रहे हैं।
भारास मुख्यालय तेलंगाना भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए के.पी. विवेकानंद गौड़ ने कहा कि हैदराबाद के प्रति मन में क्रोध व द्वेष पाल चुके मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने महेश्वरम, मेड़चल, इब्राहिमपट्टनम, चेवेल्ला निर्वाचन क्षेत्र के कुछ गाँवों का कार्पोरेशन में विलय कर रेवंत सरकार ने अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उनके सपनों के शहर फोर्थ सिटी पर ही ध्यान केंद्रित किए हुए हैं और हैदराबाद की पूरी उपेक्षा कर रहे हैं। उन्होंने जीएचएमसी वार्डों के पुनर्सीमांकन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने किसी राजनीतिक दल या जनता की राय लिए बिना ही हैदराबाद के सीमांत म्युनिसिपालिटियों का विलय जीएचएमसी में कर दिया, जिसकी जानकारी महापौर व अधिकारियों तक को नहीं दी गई। यह रेवंत रेड्डी के निरंकुश शासन का प्रतीक है।
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विवेकानंद गौड़ ने सरकार से विधानसभा के शीतकालीन सत्र को कम से कम 15 दिनों तक चलाने की माँग करते हुए कहा कि जनसमस्याएँ काफी हैं, जिन पर चर्चा जरूरी है। उन्होंने विधानसभा के सत्र को व्यक्तिगत आलोचनाओं से दूर रखने और मर्यादापूर्वक चलाने की माँग करते हुए कहा कि विधायी मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू अच्छा खासा अनुभव रखते हैं। वह चाहें तो सदन पूरी मर्यादापूर्वक चल सकता है। उन्होंने राज्य की जनता को वर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों व ज्यादतियों के खिलाफ जिस प्रकार बीआरएस ने वर्ष 2025 में आंदोलन किए, उसी तरह वर्ष 2026 में भी जनता के पक्ष में आंदोलन किए जाएँगे।
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