मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धन भी है महाराष्ट्र की यूनेस्को साइट्स
इस दिवाली के बाद आप परिवार के साथ घूमने जाने का प्लान कर रहे हैं तो महाराष्ट्र की यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स जाएँ ताकि बच्चों का मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धन भी हो और अक्तूबर में इस राज्य का मौसम भी सुहावना होता है। भारत में कुल 44 यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं, जिनमें से सबसे अधिक महाराष्ट्र में हैं, जिन्हें देखते हुए महसूस होता है कि विरासत सिर्फ इतिहास नहीं है बल्कि अनुभव है जिसे जिया, संजोया और साझा किया जाता है।
मसलन, ईसा से दो शताब्दी पूर्व की अजंता गुफाएं वास्तव में 30 रॉक-कट बौद्ध गुफा स्मारक हैं, जिनमें प्रवेश करते ही ऐसा लगता है, जैसे- आप प्राकृतिक लैंडस्केप में पेंट की गई टाइम मशीन में चले गये हैं। अजंता के भित्तिचित्र और नक्काशी बौद्ध कला के शाहकार हैं और कला परम्परा पर उन्होंने अपने स्थायी नक्शे छोड़े हैं। औरंगाबाद में एलोरा गुफाएं भारतीय रॉक-कट कला का विशाल मंच हैं, गुफा कम हैं। इनको 600-1000 ईसा पूर्व के बीच में तराशा गया था और यह हिन्दू, बौद्ध व जैन परम्पराओं की विस्तृत व्याख्या करती हैं।

कैलाश मंदिर : अद्भुत शिल्पकला और रहस्यमय निर्माण
इनका ताज है कैलाश मंदिर, जोकि गुफा नंबर 16 है। यह विश्व का ऐसा सबसे बड़ा मंदिर है, भगवान शिव के रथ के आकार में। यह कारीगरी का आश्चर्यजनक नमूना है कि 200,000 टन की चट्टान को तराशकर इस विशाल शिव मंदिर का निर्माण किया गया है, जोकि भारत की सबसे बड़ी वास्तुकला उपलब्धियों में से एक है। बिना सीमेंट व सरिया के प्रयोग के, इस विशाल मंदिर को बनाना हैरत में डालता है। एनशिंट एलियंस धारावाहिक में तो यह दावा किया गया है कि इसका निर्माण एलियंस के हाथों से हुआ है। यह दावा सच है या झूठ, कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन सदियों पहले 200,000 टन चट्टान का खनन केवल हाथ के औजारों से करके मंदिर का निर्माण करना अचंभित अवश्य करता है।


मेरा मानना है कि यह काम बिना श्रद्धा, भक्ति व दैविक मदद के मुमकिन न था। हैरत इस बात की भी है कि इस मंदिर का निर्माण ऊपर से नीचे की ओर किया गया है, जबकि हम जब भी किसी इमारत का निर्माण करते हैं तो नीचे से ऊपर की ओर करते हैं। मुंबई से नाव में थोड़ी दूर का सफर करने पर एलीफैंटा द्वीप आ जाता है, जिसे घरापुरी यानी गुफाओं का शहर भी कहते हैं। यह द्वीप रॉक-कट मंदिरों का खज़ाना है। इनमें से अधिकतर भगवान शिव को समर्पित हैं। इस साईट पर पांच हिन्दू गुफाएं हैं, प्राचीन हिन्दू स्तूप हैं और गुफाएं हैं जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से संबंधित हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस : एक वास्तुशिल्प चमत्कार
मुख्य आकर्षण विशाल त्रिमूर्ति है, और इस एक मंत्रमुग्ध करने वाले मास्टरपीस में भगवान शिव के तीनों रूप- निर्माता, विध्वंसक व रक्षक मौजूद हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (पूर्व में विक्टोरिया टर्मिनस) के निर्माण में 10 वर्ष से भी अधिक का समय लगा था। यह यूनेस्को साइट केवल एक रेलवे स्टेशन नहीं है बल्कि भारतीय प्रभाव के साथ विक्टोरियन गोथिक आर्किटेक्चर का जीता जागता शानदार नमूना है। यह टर्मिनस आज भी एक स्टेशन है, जहां यात्री महराबों, स्टेंड ग्लासों व नक्काशियों के साये में चलते हैं। मुंबई केवल एक आर्किटेक्चरल शाहकार तक सीमित नहीं है।


बॉम्बे हाईकोर्ट व मुंबई विश्वविद्यालय भी यूनेस्को साइट हैं। यह दोनों ओवल मैदान के आसपास हैं, जो कभी एस्पलेनैड कहलाता था। इसकी पूर्वी तरफ खड़ी हैं विशाल विक्टोरियन गोथिक पब्लिक बिल्डिंग्स और पश्चिमी किनारे पर हैं आर्ट डेको स्ट्रक्चर्स बैक बे रिक्लेमेशन और मरीन ड्राइव। कुल मिलाकर यूनेस्को की लिस्टिंग 94 ऐतिहासिक इमारतों को सुरक्षित रखे हुए है। हालांकि पश्चिमी घाट अनेक राज्यों में फैली हुई हैं, लेकिन बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र में है, जिसे प्यार से सह्याद्री कहते हैं, जोकि धुंध भरी पहाड़ियों, छुपे झरनों और जैव विविधता का संसार है।
महाराष्ट्र और तमिलनाडु के प्रमुख मराठा किले
अपने इकोलॉजिकल महत्व के कारण इसे यूनेस्को साइट घोषित किया गया है। यह क्षेत्र ट्रेकर्स, मानसून के दीवानों और हर उस शख्स के लिए जन्नत है जो ट्रैफिक हॉर्न की बजाय पक्षियों के गीत सुनकर जागना पसंद करता है। मराठा सैन्य लैंडस्केप साइट में 12 प्रमुख किले हैं, जिनमें से अधिकतर महाराष्ट्र में हैं और एक तमिलनाडु में है। आइकोनिक किले जैसे रायगढ़, शिवनेरी और सिंधु दुर्ग का निर्माण या विस्तार मराठों ने 17वीं शताब्दी के अंत और 19वीं शताब्दी के शुरू के बीच में कराया था।

तटों व पहाड़ों पर स्थित यह किले, शक्तिशाली रक्षा नेटवर्क थे और यह व्यापार को भी सुरक्षित रखते थे। इनकी वजह से ही मराठा सियासी व सैन्य शक्ति बने और उन्होंने अपने क्षेत्र के इतिहास को दिशा दी। वह अपनी नस्लों के लिए शानदार विरासत छोड़कर गये हैं, जिस पर गर्व किया जा सकता है।
-समीर चौधरी
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