पी.सी. घोष आयोग की रिपोर्ट को लेकर पूर्व में जारी आदेश को विस्तार

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने कालेश्वरम प्रॉजेक्ट के मामले पर गठित जस्टिस पी.सी. घोष आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, पूर्व मंत्री टी. हरीश राव, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी स्मिता सबरवाल, पूर्व आईएएस अधिकारी एस.के. जोशी के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई न करने के लिए इसके पूर्व जारी अंतरिम आदेश में पुन एक बार विस्तार दिया।

आगामी 12 नवंबर को होने वाली इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को के. चंद्रशेखर राव व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं के संबंध में पूर्ण विवरण के साथ दो सप्ताह के भीतर प्रतियाचिका दायर करने के लिए नोटिस जारी की। इसके साथ ही सरकार द्वारा दायर की जाने वाली प्रतियाचिका पर आपत्ति के साथ दो सप्ताह के भीतर जवाबी प्रतियाचिका दायर करने के आदेश दिए।

गौरतलब है कि कालेश्वरम लिफ्ट इरिगेशन परियोजना के भाग के तहत मेडीगड्डा, अन्नारम, सुंदिल्ला रिजर्वायर निर्माण और निर्वहन के मामले में धाँधलियों के चलते राज्य सरकार ने जाँच हेतु सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस पी.सी. घोष के नेतृत्व में जाँच आयोग का गठन किया। आयोग की जाँच रिपोर्ट पर विधानसभा में चर्चा के पश्चात रिपोर्ट के आधार पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न करने का आदेश देने का आग्रह करते हुए केसीआर, हरीश राव ने अलग-अलग रूप से याचिकाएँ दायर की।

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सीबीआई जांच याचिकाओं पर उच्च न्यायालय की सुनवाई

वहीं सरकार द्वारा इस मामले की सीबीआई जाँच के लिए आदेश देने को चुनौती देते हुए एस.के. जोशी और स्मिता सबरवाल ने अलग-अलग रूप से याचिकाएँ दायर की। इन याचिकाओं पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ द्वारा मंगलवार पुनः एक बार सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता ए. सुदर्शन रेड्डी ने और वरिष्ठ अधिवक्ता निरंजन रेड्डी ने प्रतियाचिका दायर करने के लिए समय देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दो याचिकाओं के संबंध में प्रतियाचिकाएँ तैयार कर ली गई है और उन्हें अदालत में दायर किया जाएगा।

अन्य दो याचिकाओं के संबंध में प्रतियाचिका दायर करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है। आग्रह को स्वीकार कर खण्डपीठ ने सरकार की प्रतियाचिकाओं पर जवाबी याचिकाएँ दायर करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता जे. रामचंदर राव समेत अन्य अधिवक्ताओं को आदेश देते हुए मामले की सुनवाई 12 नवंबर तक स्थगित कर दी। इसके साथ ही इसके पूर्व जारी अंतरिम आदेश को भी विस्तार दिया।

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