हे महाशक्ति मैया!
पार करा दो हमरी नैया,
ओ मेरी प्यारी दुर्गा मैया,
मझधार में अटक गया हूँ,
राह अपनी भटक गया हूँ।
जाऊं तो जाऊं मैं किधर से?
मंजिल पहुँचूँ तो पहुँचूँ कैसे?
कुछ समझ नहीं आ रहा,
मन व्यथित हुआ जा रहा।
धैर्य का बांध टूटा जा रहा,
हताशा से मैं घिरा जा रहा।
जग-हँसाई हुई जा रही,
अश्रु-धारा बही जा रही,
अब तो मेरे अपने भी मुझसे मुख मोड़े जा रहे,
अंदर ही अंदर मुझे बुरी तरह से तोड़े जा रहे।
माँ! तुम तो हो जगतजननी,
सफल कर दो मेरी भी करनी।
तुमरे सिवाय, है मेरा कौन?
फिर भी जाने क्यों हो मौन?
मुझे भूलों से अवगत तो कराओ,
अविलंब उचित मार्ग तो दिखाओ।
आराधक की परीक्षा कब तलक लेती रहोगी?
परिणाम की प्रतिक्षा कब तक करवाती रहोगी?
हे महाशक्ति मैया! कर दो भगत पर अहसान,
बुरे वक्त का हो जाए जीवन से शीघ्र अवसान,
बना दो कम से कम मुझे इतना शक्तिवान,
कर पाऊं सहजता से समस्याओं का समाधान,
गर्व करने लगे मेरी कामयाबी पर मेरा खानदान,
मिल पाये औरों से भी थोड़ा-बहुत मान-सम्मान।
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– महेन्द्र अग्रवाल
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