कालेश्वरम परियोजना पर घोष आयोग की रिपोर्ट कैसे प्राप्त हुई
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार जोशी से सवाल किया कि उन्हें कालेश्वरम परियोजना के निर्माण में धाँधलियों की जाँच हेतु गठित जस्टिस पी.सी. घोष आयोग द्वारा पेश की गई रिपोर्ट कैसे प्राप्त हुई। इस मामले पर आगामी 10 अक्तूबर को होने वाली सुनवाई के दौरान विवरण पेश करने के आदेश दिए।
गौरतलब है कि शैलेंद्र कुमार जोशी ने कालेश्वरम परियोजना के तहत सुंदिल्ला अन्नारम, मेडीगड्डा बैरेज की रूप कल्पना, निर्माण और पर्यवेक्षण में खामियों की जाँच हेतु गठित पी.सी. घोष आयोग की रिपोर्ट के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का आग्रह करते हुए कल याचिका दायर की थी। इस याचिका पर आज उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने सुनवाई की।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अविनाश देसाई ने दलील देते हुए बताया कि याचिकाकर्ता को इंक्वायरी कमिशन एक्ट की धारा 5 के तहत जस्टिस पी.सी. घोष आयोग ने गवाह के रूप में तलब किया था। पूछताछ के लिए हाजिर होकर आयोग द्वारा पूछे गए सवालों का याचिकाकर्ता ने जवाब दिया। इसी अधिनियम की धारा 8-बी और 8-सी के तहत नोटिस जारी किए बिना आयोग ने याचिकाकर्ता पर आरोप लगाए।
लगाए गए आरोपों के संबंध में विवरण देने का अवसर दिए बिना ही आयोग ने एकपक्षीय रिपोर्ट पेश की है, जिस कारण याचिकाकर्ता इसे रद्द करने का आग्रह कर रहा है। इस दौरान खण्डपीठ ने हस्तक्षेप कर कहा कि रिपोर्ट विधानसभा में पेश करने पर इसे विधायकों को दिया जाता है, लेकिन याचिकाकर्ता को नहीं। तब कैसे याचिकाकर्ता ने यह रिपोर्ट प्राप्त की।आयोग की रिपोर्ट को ऑनलाइन स्तर पर से भी हटा दिया गया, क्योंकि अदालत ने ही इसे हटाने के आदेश जारी किए थे।
कालेश्वरम रिपोर्ट प्राप्ति पर उठे सवाल
ऑनलाइन से भी हटाई गई रिपोर्ट याचिकाकर्ता को कैसे मिली, यह सवाल उठाया। इसका जवाब देते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस पर पूर्ण विवरण के साथ हलफनामा दायर करने की बात कही। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने इस मामले की सीबीआई जाँच के आदेश दिए, लेकिन याचिकाकर्ता को लगाए गए आरोपों के संबंध में धारा 8-बी और 8-सी के तहत नोटिस भी जारी नहीं की गई, जिससे कि याचिकाकर्ता लगाए गए आरोपों के संबंध में अपना विवरण दे सकें।
याचिकाकर्ता की राय जाने बिना आरोप लगाना अमान्य है। इसी प्रकार आयोग द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब को बयान के रूप में तैयार कर रिपोर्ट पेश करना भी अनुचित है। आयोग द्वारा यह कहना भी एकपक्षीय है कि याचिकाकर्ता ने अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई। इस दलील के साथ उन्होंने इस मामले पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई न करने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने का आग्रह किया और अंतिम फैसले के रूप में रिपोर्ट को खारिज करने का भी आग्रह किया।
यह भी पढ़ें… कालेश्वरम प्रॉजेक्ट की सीबीआई जाँच हेतु गृह विभाग ने लिखा पत्र
इस पर खण्डपीठ ने पुन रिपोर्ट प्राप्त करने के मामले पर सवाल उठाया और कहा कि क्या रिपोर्ट आधिकारिक रूप से प्राप्त हुई या कैसे प्राप्त हुई, इसका विवरण पेश करने के आदेश दिए। सरकार की ओर से विशेष अधिवक्ता पोट्टिगारी श्रीधर रेड्डी ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि 60 पन्नों की आयोग की रिपोर्ट को संक्षिप्त कर सरकार ने इसे ऑनलाइन पर जारी किया था और बाद में इसे हटा दिया गया। पूरी रिपोर्ट ऑनलाइन पर उपलब्ध नहीं है। दलील सुनने के पश्चात खण्डपीठ ने इस मामले पर सरकार को अपना रवैया और याचिकाकर्ता को रिपोर्ट कैसे प्राप्त हुई, इसका विवरण देने के आदेश देते हुए सुनवाई 10 सितंबर तक स्थगित कर दी।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



