बेदर्द तो नहीं कहेगा
दर्द मेरे पास आया
उसने मुझसे बहुत मिन्नतें की
और कहा,
मुझे अपने दिल में
थोड़ी-सी जगह दे दो,
मैं तुम्हारा अहसानमंद रहूँगा।
मैंने उस पर रहम कर
उसे अपने दिल में जगह दे दी।
अब मैं उससे मिन्नतें कर रहा हूँ कि
वो मुझे छोड़कर चला जाए
पर वो बड़े दार्शनिक अंदाज में
मुझसे कहता है,
अरे मूर्ख ! तुझे तो
मेरा अहसानमंद होना चाहिये,
क्योंकि मेरे रहते
तुझे कोई बेदर्द तो नहीं कहेगा।

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